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पंचक्रोशी यात्री उज्जैन आए, हजारों यात्रियों का पिंगलेश्वर में पड़ाव, जत्थों में चल रहे लोग
पड़ाव स्थलों पर खुले आसमान के नीचे आराम करते पंचक्रोशी यात्री।
उज्जैन | निर्धारित तिथि व मुहूर्त 11 अप्रैल से 2 दिन पहले यात्रा पर निकले पंचक्रोशी के हजारों श्रद्धालु शुक्रवार को ही उज्जैन आ गए। शनिवार को भी यात्री आएंगे। शिवरथ का नगर प्रवेश श्रद्धालुओं के साथ रविवार की सुबह कोयला फाटक से होगा। इस बार पंचकोशी यात्री शुरुआत से ही अलग-अलग जत्थो में चल रहे हैं। 9 अप्रैल को निर्धारित तिथि से 2 दिन पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर यात्रा पर निकल पड़े थे वे शुक्रवार को शहर में आना शुरू हो गए। बाद में निकले यात्री शुक्रवार को उंडासा तालाब होकर पिंगलेश्वर पहुंचे। रात्रि विश्राम बाद ये शनिवार को सुबह उज्जैन आ जाएंगे। यह श्रद्धालु शिप्रा स्नान कर आगे की यात्रा करेंगे। निर्धारित तिथि पर रवाना हुए लोग रविवार सुबह नगर प्रवेश करेंगे तथा नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर उन्हें बल लौटाकर रवाना होंगे। एडीएम जीएस डाबर ने बताया यात्रा में कहीं कोई परेशानी नहीं आ रही है। हजारों यात्री अलग-अलग जत्थे में सुरक्षित यात्रा कर रहे हैं। कुछ यात्री शनिवार को तो कुछ रविवार को नगर प्रवेश करेंगे। शिप्रा के घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।
पंचकोशी के बाद अष्ट तीर्थ की यात्रा : पंचकोशी यात्रा पूर्ण करने के बाद श्रद्धालु शिप्रा स्नान करते हुए अष्ट तीर्थ की यात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा करने के बाद ही पंचकोशी पूर्ण मानी जाती है।
महाकाल में बाहर से दर्शन, मंगलनाथ भात पूजा बंद : पंचकोशी यात्रा के दौरान महाकाल मंदिर में शनिवार, रविवार, सोमवार को गर्भगृह में प्रवेश बंद कर श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन कराए जाएंगे। मंगलनाथ मंदिर में भी 15 अप्रैल को भीड़ की स्थिति देखकर भात पूजा की व्यवस्था की जाएगी तथा 16 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर्व को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने स्थाई रूप से भात पूजा बंद करने का निर्णय लिया है।