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45 हजार का बिल नहीं चुकाया तो निजी अस्पताल ने शव देने से इनकार किया, दो घंटे तक हंगामा

3 वर्ष पहले
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फ्रीगंज के निजी अस्पताल में तीन दिन से भर्ती मरीज की मौत हो गई। उसके दिमाग की नस फट गई थी। परिजनों ने 45 हजार का बिल नहीं चुकाया तो अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इनकार कर दिया। शव ले जाने को लेकर अस्पताल परिसर में दो घंटे तक हंगामा होता रहा। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।

पंवासा में रहने वाले कैलाश पिता विक्रमसिंह देवड़ा 43 साल को चक्कर आने पर गुरुवार को फ्रीगंज के निजी अस्पताल में भर्ती किया था। शनिवार को उसकी मौत हो गई। बिल की राशि बकाया होने से अस्पताल प्रबंधन ने रविवार सुबह तक शव परिजनों को नहीं सौंपा। इसे लेकर उन्होंने आक्रोश जताते हुए हंगामा कर दिया। पिता विक्रम सिंह व भाई रमेश देवड़ा का आरोप है कि कैलाश को भर्ती करते समय ही अस्पताल ने 50 हजार रुपए जमा करवा लिए थे। 25 हजार की दवाइयां भी मंगवाई थी। मरीज की मौत होने के बाद भी अस्पताल वाले 45 हजार की मांग कर रहे थे। रुपए नहीं देने पर शव देने से इंकार कर दिया था। कांग्रेसी भी अस्पताल पहुंचे और हंगामा करने लगे। माधवनगर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अजीतसिंह ठाकुर ने अस्पताल प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया। साथ ही माधवनगर पुलिस को सूचना देकर अस्पताल बुलाया और शव को परिजनों के सुपुर्द करवाया। उन्होंने बकाया बिल भी माफ करवा दिया। इधर निजी अस्पताल के संचालक डॉ.एसएस गुप्ता का कहना है मरीज के दिमाग की नस फट गई थी। उसे गुरुवार को अस्पताल में भर्ती किया था। उसी दौरान परिजनों को बता दिया था कि आप लोग मरीज को इंदौर ले जाना चाहते हैं तो ले जाएं। इसके ऑपरेशन में खर्च आएगा। बचने की संभावना कम ही है। न्यूरो सर्जन डॉ.रूपेश खत्री ने मरीज का ऑपरेशन किया था। शनिवार रात मरीज की मौत हो गई। अस्पताल का बिल बकाया था। इस बारे में परिजनों को बताया था। वे रुपए लेने गए थे बाद में भीड़ लेकर आ गए। अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इनकार नहीं किया।

फ्रीगंज के निजी अस्पताल परिसर में हंगामा करते लोग।

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