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दिव्य दृष्टि के बिना भगवान को नहीं पहचाना जा सकता

3 वर्ष पहले
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रामकथा अध्यात्म के शिखर पर ले जाती है, सामाजिक चेतना जगाती है, यह कथा परिवारों के लिए है जो संकट दूर करती है। रामकथा कल्पवृक्ष के समान है। भगवान को वही पहचान सकता है जिसे भगवान जगा दें। भगवान श्रीराम को माता कौशल्या भी नहीं पहचान पाई थी। अर्जुन भी भगवान श्रीकृष्ण को नहीं पहचान सके थे। दिव्य दृष्टि के बिना भगवान को नहीं पहचान सकते और यह दिव्य दृष्टि गुरुजन ही दिला सकते हैं। आदिदेव महादेव ने भी शुकदेव को भगवान रामकथा का महत्व बताते हुए कथा श्रवण कराई थी।

यह बात विश्व विराट मानव कल्याण सेवा चेरीटेबल ट्रस्ट गुजरात द्वारा महामंडलेश्वर स्वामी महावीरदास के सान्निध्य में गयाकोटा सप्तऋषि मंदिर के पास इंदिरानगर में चल रही श्रीराम कथा में सिद्ध बाबा नरसिंहदास महाराज ने कथा के दूसरे दिन कही। आरती अजीत मंगलम, प्रो. कविता मंगलम, आदित्य मंगलम, माधवी मंगलम ने की। मुख्य यजमान हरिसिंह यादव ने व्यासपीठ का पूजन किया। अतिथि विक्रमसिंह जाट, पार्षद निशा सेंगर, धनीराम रायकवार, चामुंडा माता भक्त समिति अध्यक्ष राजेंद्र शाह, समर्थ संस्था अध्यक्ष श्याम माहेश्वरी, सांईबाबा मंदिर के सचिव मुकेश नीमा, मीना भारती, अनंतनारायण मीणा, दिनेश पंड्या, वैष्णव दर्जी समाज अध्यक्ष अजय नामदेव, सतीगेट व्यापारी एसो. अध्यक्ष कन्हैयालाल घाटिया, ललित मीणा, दशरथसिंह मीणा, गौरव आर्य मौजूद थे।

इंदिरानगर में ज्ञान की गंगा बहा रहे बाबा नरसिंहदास महाराज, बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए उमड़ रहे भक्त

इंदिरानगर में चल रही श्रीराम कथा में मौजूद श्रद्धालु। इनसेट कथा करते बाबा नरसिंहदास महाराज।

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