भास्कर संवाददाता | आगर मालवा
15 साल पहले उज्जैन रोड स्थित बिजली कंपनी के कार्यालय व ग्रिड पर हुई तोड़फोड़, आगजनी व पथराव के मामले में भोपाल की विशेष न्यायालय ने विधायक गोपाल परमार सहित 20 लोगों को बरी कर दिया। इन लोगों पर 2 मामले चल रहे थे और दोनों में ही अभियोजन पक्ष अपराध सिद्ध नहीं कर पाया।
कांग्रेस की दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में जमकर बिजली कटौती होती थी। शहर में भी 15-15 घंटे बिजली कटौती से लोग आक्रोशित थे। विद्युत वितरण कंपनी के तत्कालीन डीई राजहंस सेठ के बारे में शहर में अफवाह फैल चुकी थी कि वे जानबूझकर ज्यादा कटौती करवा रहे हैं। कहा जा रहा था कि ज्यादा कटौती से बिजली की बचत होती है और पुरस्कार मिलता है। इसे लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ रहा था।
अभिभाषक संघ आगर के अध्यक्ष वैभव भटनागर उस समय नेहरू कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष थे। उन्होंने छात्रनेता नितिन गर्ग, नितिन परमार आदि के साथ कटौती के विरोध में 17 फरवरी 2003 को छावनी नाके से एक रैली निकाली। इसके बाद तहसील कार्यालय के सामने धरना देकर एसडीएम व विविकं अधिकारियों को ज्ञापन देने की योजना थी। जब इन्होंने रैली आरंभ की तो मात्र 50 छात्र थे, लेकिन लोग शामिल होते गए। तहसील कार्यालय रैली पहुंचते-पहुंचते 5 हजार से अधिक लोग रैली में शामिल हो गए। बिजली कटौती को लेकर महिलाएं भी खासी नाराज थीं और वे भी शामिल हुईं।
छात्र व महिलाएं तहसील कार्यालय के सामने धरना देकर ज्ञापन दे रहे थे। इसी बीच भीड़ में से कई लोग सीधे उज्जैन रोड स्थित शक्ति नगर ग्रिड पर पहुंचे और पथराव करने के बाद डीई कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। कार्यालय में रखे कम्प्यूटर व फाइलें बाहर फेंककर आग लगा दी। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस पहुंची तो उस पर भी पथराव हुआ। इसमें तत्कालीन एसडीओपी डीके सांकल, टीआई फतेह बहादुर सिंह व प्रधान आरक्षक राजेश शर्मा को भी चोट आई थी।
घटना के बाद आगर पुलिस ने 2 मामले दर्ज किए थे। विद्युत मंडल में तोड़फोड़ व आगजनी का मामला डीई राजहंस सेठ की रिपोर्ट पर दर्ज किया था। वहीं पुलिस पर हुए पथराव के में प्रधान आरक्षक शर्मा फरियादी थे। पुलिस ने मामले में कुल 24 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया था। इनमें से पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अरुण शास्त्री व वरिष्ठ नेता जन्मेजय सोनी की मृत्यु हो चुकी है। दो आरोपी इरशाद पिता अख्तर खान व रफीक पिता रहमान खान फरार घोषित किए गए हैं। उस दौरान पुलिस पर झूठा फंसाने के आरोप लगे थे। जो लोग घटना में शामिल नहीं थे, उन्हें भी आरोपी बना दिया गया था।
जिस मामले में पुलिस ने आरोपी बनाया था, उसमें कम से कम एक साल की सजा हो सकती थी, जबकि विद्युत मंडल के कार्यपालन यंत्री सेठ की रिपोर्ट पर दर्ज मामले में धारा 436 आग लगाना भी शामिल थी। इसमें उम्रकैद का प्रावधान है।