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शहर के मंदिरों में पॉलीथिन प्रतिबंधित होगी, विकास कार्यों के बोर्ड लगेंगे ताकि श्रद्धालु राशि दान दे सके

3 वर्ष पहले
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शहर के प्रमुख मंदिरों में अब पॉलीथिन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगी। मंदिर में किए जाने वाले विकास कार्यों के बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि श्रद्धालु इन्हें पढ़कर स्वेच्छा से इनके लिए दान दे सके। यहीं नहीं श्रद्धालु या यजमान विशेष से आने वाले दान, नकद व ज्वेलरी आदि सामग्री को अब सीधे पुजारी नहीं ले पाएंगे। उन्हें ये बातें अफसरों के भी ध्यान में लाना होगी। ताकि वे संबंधितों को और ज्यादा दान के लिए प्रेरित कर समन्वय से दान का उपयोग तय कर सके। ये सभी निर्देश शुक्रवार को कलेक्टर मनीष सिंह ने दिए। वे बृहस्पति भवन में पुजारियों, प्रबंधक और मंदिर समिति के अध्यक्ष (एसडीएम) की बैठक ले रहे थे। मूल: उन्होंने यह बैठक मंदिरों की साफ-सफाई व्यवस्था व विकास कार्यों को लेकर आयोजित की थी। शुरुआत में उन्होंने पुजारियों को चरण स्पर्श करते हुए कहा कि आप लोगों ने पिछले जन्म में अच्छे कार्य किए होंगे जो आपको भगवान के नजदीक रहकर उनकी सेवा करने का मौका मिल रहा है। लेकिन श्रद्धालु की भावना काे ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी के चलते उन सभी की बैठक बुलाई गई हैं। वे बोले कि आप लोगों के परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी मैं लेता हूं। आग्रह बस इतना है कि थाली में आने वाली राशि में से कुछ मंदिरों की सफाई व विकास कार्य पर भी खर्च करो। उन्होंने कहा बैठक का मुख्य मुद्दा मंदिरों की सफाई व श्रद्धालुओं को दी जाने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाना है। उन्होंने सभी से परिचय प्राप्त कर बारी-बारी से सभी मंदिरों के पुजारियों से इन मुद्दों पर शिकायत व सुझाव देने के लिए कहा।

शहर के प्रमुख मंदिरों के संबंध में ये सुझाव और शिकायतें

मंगलनाथ

शिकायत -
पंमामृत व अभिषेक की सामग्री से नाली चौक होती हैं। फिसलन बनी रहती है। टाइल्स टूटी हैं। आरओ सिस्टम लगा है लेकिन दो में से एक ट्यूबवेल बंद हैं। कुछ लाइटें भी बंद हैं। मंदिर निर्माण के समय से भगवान के आभूषण ट्रेजरी में जमा है। वे पुन: मंदिर इसलिए नहीं ले जा पा रहे हैं क्योंकि मंदिर में सुरक्षा गार्ड नहीं।

सुझाव:- मंदिर के हर कोने में डस्ट बीन रखे जाना चाहिए। नए सभा मंडप की जरूरत है। भात से खाद बनाने की विधि पर विचार किया जाए।

सिद्धवट

सुझाव:- सिद्धवट में दूध चढ़ाने के लिए विश्वभर से लोग आते हैं। कई तो सिद्धवट तक पहुंच ही नहीं पाते हैं । इसलिए जरूरी है कि सड़क से सिद्धवट तक एक स्टील की रेलिंग लगाई जाए। इसके अलावा श्रद्धालुओं को बाहर जाने के लिए शौचालय के सामने वाले रास्ते को निर्गम द्वार के रूप में रैलिंग से कवर किया जाए।

काल भैरव

सुझाव:- पॉलीथिन बंद होना चाहिए। बगीचे का विकास किया जाए।

हरसिद्धि

सुझाव:- श्रद्धालुओं के लिए सफाई व पेजयल की जरूरत। मुख्य द्वार की रिपेयरिंग जरूरी।

चिंतामण गणेश

शिकायत:- दर्शनार्थी के बैठने/रूकने की व्यवस्था नहीं है। सफाईकर्मी वर्षों पुराने हैं।

शनि मंदिर

शिकायत:- ग्रामीण श्रद्धालुओं को ठहरने से रोका तो आना बंद हो गए। आय घट गई।

सुझाव:- श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिमा पर तेल चढ़ाने के लिए पाइप की व्यवस्था हो।

शिकायत-सुझाव सुनकर कलेक्टर ने यह दिए निर्देश

काल भैरव के गर्भग्रह में कालापन ज्यादा है एग्जास्ट फेन व बड़ा एसी लगाओ। सभी मंदिरों में पॉलीथिन बंद करों। दुकानों से जब्ती करवाओ। महाकाल को छोड़ इन सभी मंदिरों की सफाई के लिए किसी एक एजेंसी को हाउस कीपिंग का ठेका दिया जा सकता है उस पर विचार करें। मंदिरों में जरूरत अनुसार दान पेटियां बढ़ाई जाए। मंदिर में सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट रखा जाएगा। अब तक ऐसा नहीं था। पुजारियों से कहा आप में से किसी ने भी दान पेटियां बढ़ाने का सुझाव नहीं दिया। संजय पुजारी से कहा कि कितनी जगह पैर रखोगे, सारे मंदिर, सारे वीआईपी पकड़ रखे हैं। मंगलनाथ में जब पुजारी कक्ष की मांग की जाने लगी तो कलेक्टर बोले पहले भगवान के लिए व्यवस्था कर लें। मंदिरों की व्यवस्था सुधारो, आपकी आय स्वतः बढ़ जाएगी।

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