बालिका गृह की जुड़वां बहनें अब आईटी प्रोफेशनल की बेटियां बनीं
बालिकाओं को विदाई देती बालिका गृह की अधीक्षिका मीना मुंगे।
भास्कर संवाददाता | उज्जैन
15 साल की जुड़वां बहनों को गोद लेने का प्रदेश का पहला मामला मंगलवार को सामने आया। सेवा भारती की मातृछाया से इन बहनों पूजा और देविका को कोलकाता के आईटी प्रोफेशनल अंजोन गंगोपाध्याय और उनकी प|ी सोमा ने गोद लिया है। दोनों को बालिका गृह की अधीक्षिका मीना मुंगे और शिक्षिका शोभा आयाचित ने विदाई दी। उनका कहना था कि तीन साल से ये बच्चियां हमारे पास थीं, उन्हें विदा करना बहुत कष्ट दे रहा है लेकिन उनके अच्छे भविष्य की उम्मीद की खुशी भी है। ये आंसू गम और खुशी दोनों के हैं।
मातृछाया के प्रबंधक अनुराग जैन के अनुसार गोद देने वाले बच्चों की उम्र आमतौर पर 0 से 6 वर्ष की होती है। प्रदेश में बड़ी उम्र के बच्चों को गोद देने का यह दूसरा मामला है। इसके पहले 2017 में भोपाल में 12 साल के एक बच्चे को गोद लिया था लेकिन 15 साल की जुड़वां बहनों को गोद लेने का यह प्रदेश का पहला मामला है। मातृछाया से पिछले 13 साल में 136 बच्चों को गोद दिया जा चुका है। यहां शून्य से 6 साल तक के बच्चों को रखने की अनुमति है। पूजा और देविका बालिका गृह से गोद दी है। मातृछाया में सेवाभारती के अध्यक्ष रवि सोलंकी और ओम जैन ने गोद देने की परंपरा पूरी की।
उन्हेल की बेटियां अब कोलकाता में डांसर और इंजीनियर बनेंगी
पूजा और देविका उन्हेल निवासी मानसिंह चौहान की बेटियां हैं। 2013 में मां राधा की मौत के बाद पिता मानसिंह दोनों जुड़वां बेटियों को लेकर उज्जैन आ गया। रेलवे स्टेशन पर बेटियों को रखा। उसकी शराबखोरी देख किसी ने चाइल्ड लाइन को सूचना दी। चाइल्ड लाइन ने माधवनगर पुलिस के माध्यम से बालिकाओं को एक एनजीओ के यहां रखा लेकिन एनजीओ बंद हो गया। इस पर उन्हें कस्तूरबा छात्रावास में भर्ती कराया। बाद में उन्हें बालिका गृह में भेजा। 2015 से दोनों वहां रह रही थीं।