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चने की तुलाई समर्थन मूल्य पर नहीं करने पर हंगामा

3 वर्ष पहले
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कृषि उपज मंडी परिसर में क्रय विक्रय सहकारी समिति की ओर से सरकारी कांटों पर किसानों के चने नहीं तोलने पर किसानों ने नाराजगी जताते हुए हंगामा कर किया। आस-पास के गांव से आए राधेश्याम शर्मा, प्रहलाद याकुबपुरा, मिश्रीलाल, किशनलाल, रामराय चौधरी, लक्ष्मीनारायण, विनोद, सिताराम, पप्पूलाल, रामसहाय सहित कई किसानों ने चने की क्वालिटी सही होने के बावजूद उसे निरस्त करने पर कर्मचारियों व अधिकारी को खूब खरी-खोटी सुनाई। किसानों ने बताया कि करीब एक डेढ़ माह समर्थन मूल्य पर चने को बेचने के लिए पंजीयन करवाया था। उसके बाद शुक्रवार को किराए से ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था कर उसमें चने लेकर आए। मगर मंड़ी परिसर में चने को लाने पर क्वालिटी खराब बता दी एवं विजातिय तत्व अधिक बताकर निरस्त कर दी। जब कि किसान सुबह से ही सरकारी कांटों पर चने बेचने आ गए थे। मगर समिति के कर्मचारी, अधिकारी विजातिय तत्व अधिक बताकर निरस्त कर दिया। जबकि चने की क्वालिटी अच्छी है, मगर किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों के समर्थन मूल्य पर चने नहीं खरीदने पर किसानों ने अपना गुस्सा समिति के कर्मचारियों व अधिकारी पर निकाला।

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दो प्रतिशत से अधिक विजातीय तत्व नहीं होना चाहिए

मंड़ी परिसर में समर्थन मूल्य पर चने व सरसों की खरीद की जा रही है। मगर चने में दो प्रतिशत से अधिक विजातीय तत्व अधिक आ जाने के कारण वेयर हाऊस में माल नहीं ले रहे हैं। इसी कारण से विजातिय तत्व अधिक आ जाने से बांदीकुई के वेयर हाऊस में पांच दिन से एक ट्रक खड़ा है, जो उनियारा से भेजा गया था। जिसकी क्वालिटी विजातिय तत्व अधिक आ जाने से खराब बता दिया। इस कारण दो प्रतिशत से अधिक विजातिय तत्व अधिक होने के कारण माल नहीं लिया जा रहा है। - महावीर सिंह गुर्जर, मैनेजर, क्रय विक्रय सहकारी समिति उनियारा।

विजातीय तत्व तो आते ही हैं:किसानों का कहना है कि इससे अच्छी क्वालिटी नहीं आ सकती है। पचास बोरियों से विजातिय तत्व किसान नहीं निकाल सकता है, क्योंकि कृषि जिंसों में तो विजातिय तत्व आते ही हैं। पहले भी पांच प्रतिशत चने में विजातिय तत्व आने के बाद भी समर्थन मूल्य पर चने की खरीद की गई। मगर अब दो प्रतिशत ही विजातिय तत्व कर देने से किसानों का माल सरकारी कांटोंं पर नहीं तोला जा रहा है। किसानों ने कलेक्टर, विधायक, सांसद, कृषि मंत्री से किसानों की समस्या का निराकरण करने की मांग की है।

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