उनियारा गलवा बांध में खरबूजे व तरबूज, टिण्डे की खेती करने से बांध में दिन रात चहल पहल बनी हुई हैं। इस बांध से पैदा किए गए खरबूजे व खरबूजों की मिठास कारण उनियारा का नाम दूर-दूर तक फैला हुआ है। इस बांध के खरबूजे, तरबूज जयपुर, दिल्ली, सहित कई जगह पर बिकने जा रहे हैं।
पूर्व में टोंक जिले में खरबूजों के कारण राजस्थान सहित दूसरे राज्य में टोंक जिले का नाम था, मगर बीसलपुर बांध बनने के बाद टोंक बनास में उगाए जाने वाला खरबूजों का नाम निशान नहीं रहा। उनियारा गलवा बांध की जमीन उपजाऊ हैं। हालांकि पानी की कमी से फसलें सूख रही हंै।
खेती किसानी
टोंक-सवाई माधोपुर-बूंदी के 400 परिवारों ने बो रखी हैं खरबूजे-तरबूज की फसल
उनियारा. गलवा बांध के पेटे जमीन पर कीर समाज द्वारा बोई गई खरबूज की खेती। इस बार पानी की कमी के कारण फसलें सूखने की कगार पर है।
इन जगहों से खेती करने आते हैं लोग : अब यहां टोंक, सवाईमाधोपुर, बूंदी, उनियारा, नैंनवा, देई, चौथ का बरवाड़ा, बनेठा, ककोड़, अलीगढ़, मेहंदवास, देवली सहित कई जगह के करीब तीन-चार सौ परिवार गलवा बांध की पेटे पर किसानों से किराया से जमीन लेकर चार पांच माह तक खरबूजे, तरबूज, टिण्डे की खेती करते हैं एवं पूरे परिवार के साथ इसी बांध पर बस जाते हैं, जिनके देखरेख में तरबूज, खरबूजों की खेती होने पर वाहनों में नियमित जयपुर, दिल्ली बेचने जाते हैं।