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श्रीकृष्ण की गाथा पर प्रदर्शनी में चित्रशैली को दिखाया

3 वर्ष पहले
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शहर के जिला संग्रहालय में भारतीय चित्रकला में श्रीकृष्ण गाथा विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई है। शुक्रवार को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। यह चित्र प्रदर्शनी 25 मई तक लगी रहेगी। देश के अलग-अलग हिस्सों की चित्र शैली को प्रदर्शनी में दिखाया गया है। 50 से अधिक छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल किए गए, जो 16वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक के हैं। प्रदर्शनी संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार की ओर से विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर लगाई गई है।

गड़वाल शैली के चित्र में कालिया दमन काे दिखाया गया है। प्रभारी क्यूरेटर डॉ अहमद अली ने बताया कि कलाकार ने इस चित्र के माध्यम से यमुना की स्वच्छता का संदेश दिया है। भगवान कृष्ण यमुना को विषाक्त नहीं देखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कालिया नाग का दमन कर नदियों की पवित्रता और स्वेच्छा का संदेश दिया। प्रदर्शनी में क्यूरेटर ने बताया कि 15वीं-16वीं शताब्दी में भक्ति आंदोलन के उद्भव में वैष्णव भक्ति मार्ग को विषयवस्तु पर चित्र सज्जित पुस्तकों के निर्माण पर प्रोत्साहित किया। शुभारंभ विदिशा विधायक कल्याणसिंह ठाकुर ने किया। इस मौके पर पं. गंगाप्रसाद पाठक ललित कला न्यास के कार्यकारी गोविंद देवलिया, बेतवा उत्थान समिति के सचिव अतुल शाह, विजय चतुर्वेदी, किशोरी सिंह आदि मौजूद थे।

विश्व संग्रहालय दिवस

यह चित्र प्रदर्शनी 25 मई तक लगी रहेगी। देश के अलग-अलग हिस्सों की चित्र शैली को प्रदर्शनी में दिखाया गया है

जिला संग्रहालय में भारतीय चित्रकला में श्रीकृष्ण गाथा विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई।

ये चित्र किए शामिल : इस छायाचित्र प्रदर्शनी में कृष्ण कथा 16वीं ई. से 19सदी को शामिल किया गया जो श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनके जीवनकाल में घटित होने वाली घटना व प्रसंग शामिल हैं। इसमें कृष्ण जन्म, कालिया दमन, माखन चोर, राधा व गोपियों के प्रसंग, होली, कालाष्टमी, रुक्मणि से रिश्ते पर प्रकाश डालते हुए चित्र, कृष्ण सुदामा प्रसंग, भाई बलराम, कंस वध, गीता उपदेश जैसे छायाचित्रों को शामिल किया गया है।

प्रदर्शनी में शामिल कीं विभिन्न शैलियां

भारतीय चित्रकला की प्रमुख शैलियों से चित्रित कला चित्रों में भारत के जीवन दर्शन के अलावा देवी-देवता विशेषकर राधा-कृष्ण कथाओं के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हुई रचनाएं भारतीय जनमानस में प्रचलित हुईं। तात्कालिक परिप्रेक्ष्य में चित्रकला की विभिन्न शैलियां प्रचलित थीं। इसमें मुगलकाल, दक्कन शैली, गुजरात शैली, राजपूत शैली, (मेवाड़, बीकानेर, अलवर सहित अन्य) शैली हैं। इसी तरह पहाड़ी शैली, बसोली, गुलेरा गड़वाल, मालवा, मराठा, मुगल शैली, राजपूत, जम्मू व कांगड़ा शैली के चित्र शामिल हैं।

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