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खरीदी केंद्र पर 24 घंटे खड़े रखे चने के नौ ट्रक, कागज न बनने से नहीं हो पाया परिवहन

3 वर्ष पहले
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बारदाने की एवज में अधिक तौल की समस्या

भास्कर संवाददाता | रायसेन

शहर की कृषि उपज मंडी में चना खरीदी केंद्र पर लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालत यह है कि मंडी परिसर में 5 हजार क्विंटल से अधिक चना परिवहन के लिए पड़ा हुआ है। इसके बाद भी चने से भरे नौ ट्रक चौबीस घंटे वहां खड़े रखे गए हैं। इसके चलते खरीदी केंद्र से चने के परिवहन में देरी हो रही है। यदि इन ट्रकों को समय पर वहां से छोड़ दिया जाता तो बड़ी मात्रा में चने का परिवहन वहां से हाे सकता था। सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने बताया कि सर्वर डाउन होने से साइट नहीं खुल पा रही थी। इसके चलते उनके कागज नहीं बन पाए थे। इन कारणों से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उन्हें घाटा भी उठाना पड़ रहा है। बारदाने की एवज में अधिक तौल की समस्या पहले से ही चल रही है।

सरकारी नियमों के मुताबिक उपज खरीदी के 24 घंटे भीतर ही इसका परिवहन भी किया जाना है। इससे किसानों को समय पर राशि भुगतान किया जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

सहकारी समिति की सफाई...सर्वर डाउन होने से नहीं चल पा रही साइट, इसलिए नहीं बन पा रहे कागज

खास-खास

3 लाख70 हजार मीट्रिक टन-गेहूं के उपलब्ध कराए गए गोडाउन और कैप क्षमता

70 हजार मीट्रिक टन-चने के लिए उपलब्ध कराए गए गोडाउन क्षमता

एक नजर में उपज खरीदी और उसका परिवहन

उपज खरीदी परिवहन शेष

गेहूं- 4,14,619 3,56,553 58066

चना- 42494 32922- 9572

मसूर- 35000 000 35000

सरसों का शुरु ही नहीं हो पाया परिवहन

जिले में नाफेड द्वारा चना, मसूर और सरसों की खरीदी जिले में की जा रही है। अभी तक 35 हजार मीट्रिक टन सरसों खरीदी जा चुकी है लेकिन उसका परिवहन शुरु भी नहीं हुआ है। इसके चलते पूरी की पूरी सरसों सरकारी खरीदी केंद्रों पर ही पड़ी हुई है। वहीं 58 हजार मीट्रिक से अधिक गेहूं भी खरीदी केंद्रों पर परिवहन न हो पाने के कारण पड़ा हुआ है।

कृषि उपज मंडी में 24 घंटे से खड़े हैं चने से भरे ट्रक, भर गया कृषि उपज मंडी परिसर।

विदिशा और होशंगाबाद में कराया जा रहा है भंडारण

वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के प्रबंधक जीएस हिंडोलिया के मुताबिक गेहूं के लिए 3 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं भंडारण क्षमता उपलब्ध कराई गई है। वहीं चने के लिए 70 हजार मीट्रिक टन क्षमता के गोडाउन उपलब्ध कराए गए हैं। होशंगाबाद में 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले कैप में गेहूं का भंडारण कराया जा रहा है।

सर्वर डाउन होने के कारण कागज नहीं बन पाए थे। इसके चलते चने का परिवहन नहीं हो पा रहा है। इससे खरीदी केंद्र पर चना जमा हो गया है। वहीं चने की आवक काफी अधिक हो रही है। सुभाष शुक्ला, प्रबंधक सहकारी समिति रायसेन

चने को परिवहन तो 76 फीसदी पर पहुंच गया है लेकिन मसूर का कम हुआ है। वहीं अभी सरसों को परिवहन तो शुरु ही नहीं हो पाया है। प्रदीप गेहरवाल, डीएमओ रायसेन

भर गए तीन टीन शेड और परिसर का बड़ा हिस्सा

जिला मुख्यालय पर मंडी परिसर में बनाए गए चना खरीदी केंद्र पर चना डंप होने के कारण स्थिति बिगड़ने लगी है। हालत ये है कि तीन टेन शेड चने की बोरियों से भर गए हैं। जिनमें हजारों क्विंटल चना भरा पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं मंडी परिसर का बढ़ा हिस्सा जाम हो गया है। इसके चलते आवाजाही और किसानों को वहां ट्रालियां खड़ी करने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।

बारदाने में 500 ग्राम वजन, तुलाई 800 ग्राम

जिला मुख्यालय के आला अधिकारी रायसेन के चना खरीदी केंद्र पर ही व्यवस्थाओं को नहीं सुधार पा रहे हैं। अधिक तुलाई वाला मामले में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं देखा जा रहे है। केंद्र पर करीब 12 तौल कांटे चल रहे हैं। सभी पर 500ग्राम वजनी बारदाने की एवज में किसानों का 800 ग्राम चना तौला जा रहा है। यानी की प्रत्येक 50 किलो पर हर किसान को अभी भी 300 ग्राम चने का नुकसान उठाना पड़ रहा है। चने का भाव यदि 44 रुपए प्रति किलो मान लिया जाए तो किसान को एक बोरी पर 132 रुपए की चपत लगाई जा रही है।

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