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विदिशा| व्यक्ति को जीवन में प्रत्येक कार्य साेच समझ कर

3 वर्ष पहले
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विदिशा| व्यक्ति को जीवन में प्रत्येक कार्य साेच समझ कर करना चाहिए। जाने-अनजाने कर्म का फल अवश्य प्राप्त होता है। संसार में कर्म की प्रधानता है। दाम्पत्य जीवन में पति- प|ी दोनों गाड़ी के पहियों के समान है। यह बात पृथ्वी उद्धार कथा सहित राजा परीक्षित के शाप प्रसंग में कथा व्यास आचार्य भागवत भूषण पं. विष्णु प्रसाद शास्त्री ने कही। वे चिड़ौली शक्ति पीठ बेस नगर में चल रही भागवत कथा तथा पंच कुंडात्मक लक्ष्मीनारायण यज्ञ में कथा प्रस्तुत कर रहे थे। शुक्रवार को सर्वप्रथम देव पूजन आव्हान कर अरणी मंथन द्वारा अग्नि प्रकट कर स्थापित कर यज्ञ आरती की गई। महिलाओं द्वारा यज्ञ परिक्रमा की गई। सकाम उपासना की गई। आचार्यश्री ने अस्तु सती चरित्र में दाम्पत्य जीवन का भी महत्व बताया। उन्होंने कहा कि पुराण कथाएं कही न कही जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। यज्ञ में विजय शर्मा, एचएन बुधोलिया, ओपी दुबे एडवोकेट, दीनदयाल श्रीवास्तव, तुलसीराम शर्मा, कंछेदीलाल सोनी, डा. परमानंद मिश्रा, हरेंद्र सर, उमेश ताम्रकार, विजय श्रीवास्तव, नारायणसिंह मीना, दुष्यंत श्रीवास्तव, रामगोपाल रघुवंशी सहित 15 यजमान उपस्थित थे। कथा में ऋषि श्रीवास्तव, रवि मौर्य, सोनू, हल्के ने संगीत दिया। संचालन संतोष सागर ने किया। 15 ब्राह्मणों के मंडल द्वारा यज्ञ कार्य संपन्न कराया गया।

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