सम्राट अशोक अभियांत्रिकीय संस्थान (डिग्री) में 18 मई को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के फाउन्डर कुलपति एवं प्रेसीडेन्ट आॅफ एसोसिएशन आॅफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू दिल्ली) के प्रोफेसर डाॅ. प्रीतम बाबू शर्मा ने ”नरचर्रिंग ए कल्चर आॅफ रिसर्च, इनोवेशन एवं स्टार्टअप“ पर व्याख्यान दिया।
संचालक डाॅ. जेएस चौहान एवं सभी विभागाध्यक्षों ने पुष्प गुच्छ प्रदान कर डाॅ. पीबी शर्मा का स्वागत किया। श्री चौहान ने स्वागत भाषण में डाॅ. शर्मा का परिचय देते हुए कहा कि हमारे पूर्व छात्र एवं संस्था के गौरव डाॅ. शर्मा इस देश के विजनरी टेक्नाॅेक्रेट एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविद् है। उनके संस्था आगमन से हम सभी गौरवान्वित हैं। डाॅ. चौहान ने सभी फेकल्टी से देश को आधारभूत संरचना तथा हेप्पिनेस इंडेक्स में ऊपर लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खासतौर से हमारी संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, जल प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन, कौशल विकास के क्षेत्र में जिला विदिशा एवं प्रदेश के विकास में अपनी महती भूमिका अदा करेगी। तदुपरांत डाॅ. शर्मा ने संस्था के कांफ्रेंस हाॅल में सभी विभागाध्यक्ष एवं कोर्स समन्वयकों की बैठक में कहा कि हम सभी प्राध्यापकों को अपने विषय से संबंधित नई खोज एवं नवीनता का ज्ञान होना चाहिए।
उन्होंने अपने व्याख्यान में अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को याद कर अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि हम शिक्षण जैसे नेक कार्य में हैं। हमें इस कार्य को पूर्ण लगन एवं सत्यनिष्ठा से निष्पादित करना चाहिए ताकि हमारे द्वारा पढ़ाये गए विद्यार्थी डाॅ. एपी.जे अब्दुल कलाम, वैज्ञानिक डाॅ. सीवी रमन एवं इंजी. कैलाश सत्यार्थी जैसे बनकर देश का नाम रोशन कर सकें।
प्राध्यापकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, रिसर्च एवं इनोवेशन का समावेश कर विद्यार्थियों को तैयार करना चाहिए तभी उद्यमिता एवं स्टार्टअप का जन्म होगा। तभी देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विदिशा एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। हम सभी को इस बात को दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान कर नई तकनीक का आविष्कार करना चाहिए। प्राध्यापकों एवं अनुसंधानकर्ताओं को समाज के उत्थान एवं जन कल्याण से संबंधित विषयों पर केन्द्रित होकर अनुसंधान कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में डाॅ. चौहान ने डाॅ. शर्मा को स्मृति चिन्ह भेंटकर संस्था की ओर से धन्यवाद दिया। डाॅ. संजय कटारे ने इस कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि डाॅ. शर्मा को शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी वर्तमान आवश्यकताओं को रेखांकित करने के लिए आभार प्रेषित किया। इस अवसर पर संस्था के सभी प्राध्यापक उपस्थित थे।