पहली बार परशुराम जयंती पर ब्राह्मणों ने शस्त्रों का नहीं किया प्रदर्शन
भगवान परशुराम जयंती पर शोभायात्रा में पहली बार ब्राह्मणों ने शस्त्रों का प्रदर्शन नहीं किया। बुधवार शाम को भगवान परशुराम चौक(पेढ़ी चौक) पर शहर के ब्राह्मण युवा शस्त्र लेकर जुट गए थे। शस्त्र लाने पर पुलिस ने कानून का हवाला दिया। इस बीच युवाओं की बहस भी हुई। सीएसपी भारतभूषण शर्मा ने समाज के सभी लोगों से आग्रह किया कि शस्त्र प्रदर्शन इस बार न करें। इस बात पर सभी राजी हो गए और शस्त्र वापस रख लिए।
सबसे पहले पेढ़ी चौक पर भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की गई। शोभायात्रा पेढ़ी से बजरिया पहुंची। यहां ब्राह्मण समाज के नेता दीपक तिवारी ने सभी का स्वागत किया। यहां नन्हे परशुराम के प्रति रूप में खड़ा किया गया था।
जयंती
शोभायात्रा में शस्त्र लेकर पहुंचे थे युवा, पुलिस ने कानून का हवाला दिया तो हुई बहस फिर सीएसपी के समझाने के बाद माने
भगवान का किया आकर्षक शृंगार
पं. शिवराम शर्मा को भगवान परशुराम के प्रतीक के रूप में आकर्षक श्रृंगार कर एक रथ पर विराजित किया गया था। शोभायात्रा में पूर्व सांसद पंडित प्रतापभानु शर्मा, सीसीबी चेयरमैन पंडित श्यामसुंदर शर्मा, उद्योगपति राकेश शर्मा, संजीव शर्मा, कमल सिलाकारी, अतुल तिवारी, यतींद्र बहुगुणा सहित कई लोग शामिल थे।
स्वाभिमान के लिए किसी भी हद तक जाएं ब्राह्मण, समझौता न करें: डॉ. आचार्य
शोभायात्रा में हजारों की संख्या में शामिल ब्राह्मण समाज के युवाओं और बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बन रहा था। शोभायात्रा किला अंदर, बजरिया जयस्तंभ, बड़ा बाजार, तिलक चौक, निकासा रोड, माधवगंज, अस्पताल रोड से होते हुए सावरकर बाल विहार पर जाकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। धर्मसभा को महर्षि महेश योग वैदिक विश्वविद्यालय शिकागो के पूर्व वीसी डॉ नीलंप आचार्य ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने स्वाभिमान की कला सिखाई है।। राजनैतिक दबाव में ब्राह्मण मूल्यों से समझौता न करें। ब्राह्मण सदा ही सभी के कल्याण की कामना करते हैं और जनकल्याण की बात करते हैं। सभा का संचालन संतोष शर्मा सागर ने किया और आभार संजीव शर्मा एवं सुजीत देवलिया ने माना।