विदिशा| शहर में बाल बिहार के पास अग्रवाल धर्मशाला में चल रही भगवान श्री रामदेव कथा के दौरान भगवान का अवतरण झांकी के बीच पालने में हुआ। भगवान श्री द्वारकानाथ को श्री रामदेव के रूप में घर आया देख राजा अजमलजी और उनकी प|ी मेंणादे की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दोनों ने भगवान की आरती उतारी। श्रद्धालुओं ने भगवान के अवतरण पर जयकारे लगाए। भगवान के अवतरण की कथा के माध्यम से गुरुदेव पं. हरिनारायण पाठक ने कहा कि परमात्मा जब भी धरती पर आता है। पापियों का नाश करने और सदमार्ग बताने आता है। उसके साथ शक्तियां भी आती हैं। भगवान श्रीकृष्ण जब श्री रामदेव के रूप में आए। उनके आने से पहले बलराम भी वीरम देवजी के रूप में पहले आए। वीरम देवजी शेषनाग के अंश माने जाते हैं। जब जब परमात्मा धरती पर आता है। उसे पहले शक्तियां धरा पर आने लगती है जो परमात्मा के आने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती हैं। अर्थात यहां धरा का अर्थ हृदय है।