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जीव को शिव बनाती है राम कथा: पं. मनावत

3 वर्ष पहले
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काम, क्रोध और लोभ के शूल जिसे जकड़ ले वह जीव है। जो इन तीनों को संभाल ले वह शिव है। भगवान शिव इसीलिए शूलपाणि है। वे विष पीकर भी संसार को गंगा जल बांटते हैं। जो अपकार का बदला भी उपकार से दे वह महादेव है। शिव का निवास इशान्य कोण है। यह दिशा पूर्व और उत्तर के बीज का कोण है। पूर्व दिशा ज्ञान की और उत्तर समाधान की दिशा है। जिसका ज्ञान समाज को समाधान दे वह शिव है। उक्ताशय के उद्गार मानस मर्मज्ञ पं श्याम मनावत ने गिरधर गार्डन में चल रही राम कथा में व्यक्त किए।

कथा के दूसरे दिन आपके शिव चरित्र सुनाते हुए कहा कि समुद्र मंथन में किसी को लक्ष्मी, किसी का कौस्तुभ मणि, किसी को ऐरावत, किसी को उच्चाश्रवा घोड़ा मिला परंतु शिव विष पीकर भी प्रसन्न है। जो मिल जाए, जितना मिल जाए, जब मिल जाए उसमें जो संतुष्ट है वही शिव है। संतुष्टि का दूसरा नाम शिव है।

कथा में मंगलवार को शिव पार्वती का विवाह धूमधाम से मनाया गया। पंडित मनावत ने इस अवसर पर कहा कि श्रद्धा का वरण विश्वास कर ले तो शिव विवाह है। अपनी श्रद्धा को जिस दिन विश्वास मिल जाए वहीं दिन हमारे लिए शिवरात्रि है।

कथा के प्रारंभ में डा. अशोक अग्रवाल और परिवारजनों ने व्यास पीठ का पूजन किया। कथा गिरधर गार्डन में प्रतिदिन अपरांह तीन से छह बजे तक चल रही है।

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