विदिशा| लगातार जलाई जाने से हो रही लकड़ी की कमी, वृक्षों की कटाई से पर्यावरण को पहुंच रही क्षति, लकड़ी जलाने से हो रहे प्रदूषण को देखते हुए एसएटीआई के प्रोफेसर धर्मेंद्र शाह ने अनूठा निर्णय लेते हुए अपनी माताश्री गुणवंती शाह का अंतिम संस्कार लकड़ी के बजाय बायो कोल पर किया।
बेतवा उत्थान समिति के सचिव तथा लायंस क्लब के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अतुल शाह ने बताया कि सोयाबीन के भूसे से निर्मित बायो कोल का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से जहां लाभकारी है वहीं लकड़ी की तुलना में यह सस्ता भी पड़ता है। ऐसा करने से पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है।