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ईश्वर के प्रति सच्चा समर्पण हो तो हमेशा मनोकामना होती है पूर्ण : गुरुदेव पाठक

3 वर्ष पहले
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समर्पण का सच्चा भाव हो, निश्छल भक्ति हो तो भक्त की कामना ईश्वर को पूरी करना पड़ती है। राजस्थान में राजा अजमल की भगवान द्वारकानाथ के प्रति अटूट भक्ति थी। भगवान ने न सिर्फ उनको दर्शन दिए बल्कि उनके घर पुत्र के रुप में अवतरित होने का वचन भी दिया।

यह बात रविवार को गुरुदेव पं. हरिनारायण पाठक ने भगवान श्रीरामदेव की कथा के दूसरे दिन अग्रवाल धर्मशाला में कही। गुरुदेव ने कहा कि जब- जब भी ईश्वर का धरा पर अवतरण होता है भक्तों के कारण ही होता है। जब- जब धरती पर पाप ,अत्याचार, अनाचार बढ़ते हैं ईश्वर को निराकार से साकार हो कर अवतरित होना पड़ता है।

भगवान द्वारकानाथ भक्त अजमल का मान रखने और राक्षस भैरव के अत्याचारों से राजस्थान की प्रजा को मुक्त कराने श्रीरामदेव के रूप में आए। गुरुदेव ने कहा कि ईश्वर तो सभी को मानव बनाकर भेजता है लेकिन मानव के कर्म उसे देवता या दानव जैसा बनाते हैं। भैरव भी साधारण वैश्य पुत्र के रुप में पैदा हुआ था लेकिन उसके दुष्कर्मों के कारण गुरु बालीनाथ के श्राप से भैरो राक्षस बना।

उन्होंने कहा कि मानव को जीवन में सत्कर्म और परोपकार करना चाहिए। ताकि देश व समाज का भला हो। वह दूसरों के लिए प्रेरक बने। इससे सद्गति का मार्ग प्रशस्त होगा। ईश्वर की कृपा जीवन में मिलेगी।

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