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शरबती गेहूं का स्थान अन्य किस्मों ने लिया 300 किमी के दायरे में उपज 50% घटी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा

देश विदेश में सोने जैसी चमक और विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध शरबती गेहूं का उत्पादन आधा हो गया है। गेहूं की यह खास वैरायटी प्रदेश के 306 किलोमीटर के दायरे में ही पैदा होती है। जैसे- जैसे विदिशा, सागर, सीहोर, अशोकनगर, रायसेन,गुना में सिंचाई के संसाधन बढ़ रहे हैं इससे मिलती जुलती उन्नत किस्मों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। किसान शरबती की पैदावार कम करते जा रहे हैं।

ऐसे पड़ा 306 नाम

306 किलोमीटर के दायरे में काली मिट्टी की मोटी पर्त है। कृषि का बड़ा भू-भाग असिंचित है। इन परिस्थितियों के चलते कृषि वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र के लिए शरबती की इस किस्म को तैयार किया था। इसका नाम 306 दिया गया। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह एक बार की सिंचाई में ज्यादा से ज्यादा छह गुना पैदावार देती है। सोने जैसी चमक, मोटा दाना और स्वाद के कारण आम गेहूं से डेढ़ गुना दाम पर बाजार में मिलता है। अब सिंचाई का क्षेत्र बढ़ने से किसान शरबती के स्थान पर दूसरी किस्म का उपयोग करने लगे हैं। यह शरबती से मिलती जुलती है। पैदावार दस गुना देती है।

उत्पादन के लिए काली मिट्टी जरुरी

बीज विक्रेता श्याम बाबू अग्रवाल ने बताया कि शरबती की इस खास किस्म के लिए खास काली मिट्टी चाहिए। ऐसी मिट्टी प्रदेश में विदिशा और उसकी सीमा से लगे जिलों में हैं। ऐसी मिट्टी देश के दूसरे प्रांतों में नहीं है। इस किस्म की दूसरी विशेषता है कि इसे एक पानी ही चाहिए। ज्यादा पानी की जरूरत नहीं है।

घट रहा है रकबा

सही है कि विदिशा जिले के तीन सौ किलोमीटर के दायरे में ही शरबती 306 की किस्म होती है लेकिन दूसरी किस्में अच्छी पैदावार वाली आने से इसका रकबा घट रहा है। एके कौरव , एसएडीओ कृषि विभाग गंजबासौदा।

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