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आस्था की जोत में होता है दुख दर्द का निवारण

3 वर्ष पहले
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पुरातत्व काल से ही भारत देश आध्यात्मिक भावना से ओत-प्रोत रहा है। आध्यात्म की जहां पर भी बात आती है, सहसा ही हमारे मन में श्रद्धा का ज्वार फूटने लगता है। देश के हर कोने में विभिन्न रूपों में पूजे जाने वाले देवी देवताओं में श्रद्धालुओं की अपार भावना निहित है। ऐसा ही विराटनगर उपखंड के गांव कांकरा धूलकोट स्थित झुंडावाले बालाजी का मंदिर है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर से श्रद्धालुओं का आध्यात्म रुपी अट्टू विश्वास जुड़ा हुआ है। यहां पर जलने वाली आस्था की जोत में श्रद्धालुओं के हर दुख दर्द का निवारण होता आ रहा है। मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित होने वाले वार्षिक मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह का माहौल बना हुआ है।

मेले की तैयारी व्यवस्था में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे है। मंदिर के प्रति लोगों में अपार श्रद्धा, मान्यता व विश्वास को लेकर भास्कर ने जानकारी ली तो रोचक तथ्य सामने आए।

रुक गया रथ, हुई आकाशवाणी...

ग्रामीणों में मान्यता है कि करीब 700 वर्ष से अधिक समय पूर्व कांकरा धूलकोट में हनुमान जी की प्रतिमा मंदिर परिसर से थोड़ी दूर खेत से निकली थी। प्रतिमा को देखकर अनेक स्थानों के साधु संत एकत्रित हुए और प्रतिमा को अन्यत्र स्थापित करने के लिए बैलगाड़ी के माध्यम से ले जा रहे थे। बैलगाड़ी कुछ दूरी पर चल कर (जहां अब मंदिर है) अचानक रुक गई। साधु-संतों व ग्रामीणों ने अन्य बैलों की सहायता से बलपूर्वक मूर्ति को आगे ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बैलगाड़ी हिली तक नहीं। इसी दौरान बैलगाड़ी आगे से स्वतः ही उठ गई , जिससे मूर्ति जमीन पर सीधी खड़ी हो गई। किवदंती है कि इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि मूर्ति को कल सुबह यहां स्थापित कर देना। खबर क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के साथ विद्वान पंडितों व साधु संतों ने विधिवत उसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना कर दी। शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं में आस्था देखते ही बनती है। श्रद्धालुओं ने बताया कि यहां आने पर हर प्रकार के असाध्य बीमारी के मरीज भले चंगे हो जाते हैं व हर दुख दर्द दूर होते है।

भव्य मंदिर का निर्माण...

हनुमान जी की सैकड़ों साल पुरानी इस मूर्ति पर छाया का अभाव हर श्रद्धालु के मन को कचोट रहा था। जिसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। करीब 35 फुट ऊंचाई के इस मंदिर का निर्माण बयाना भरतपुर के पत्थर से हो रहा है। मंदिर पर कुशल कारीगरों द्वारा अनेक प्रकार की कलाकृति उकेरी जा रही है जो श्रद्धालुओं को मोहित कर रही है। पुजारी पूरणमल ने बताया कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु को आत्म शांति मिलती है।

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