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सातवें वेतनमान की पहली किश्त से वंचित रह जाएंगे हजारों सरकारी कर्मचारी

3 वर्ष पहले
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सन् 2006 के बाद पदोन्नति एवं क्रमोन्नति प्राप्त अधिकारी-कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का निर्धारण कोषलेखा से पारित करवाने में व्यावहारिक कठिनाई आ रही है। साफ्टवेयर में तकनीकि खामियों के चलते वार्षिक वेतनवृद्धि की सही गणना न होने के कारण सातवें वेतनमान का ठीक से निर्धारण नहीं हो रहा है। इससे कोषलेखा से शासकीय सेवकों के प्रकरण पारित नहीं हो पा रहे है ।

मप्र शिक्षक कांग्रेस ने वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि तकनीकी खामियां तत्काल सुधारकर साफ्टवेयर में पर्याप्त फंक्शन लोड किए जाए।

मप्र शिक्षक कांग्रेस के संभागीय अध्यक्ष जगदीश प्रसाद मिश्रा ने श्यामपुर में इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि सातवें वेतनमान के एरियर की प्रथम किश्त का भुगतान मई 2018 में होना है । इससे पूर्व अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन निर्धारण कोषलेखा एवं पेंशन विभाग से पारित होना आवश्यक है। लेकिन साफ्टवेयर में गड़बड़ी से वेतन निर्धारण प्रक्रिया में बने अवरोध के कारण समय पर देय एरियर से कर्मचारी-अधिकारी वंचित रह सकते है। इस अव्यवस्था को लेकर कर्मचारी जगत में आक्रोश व्याप्त है । शिक्षक नेता श्री मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर सॉफ्टवेयर में अविलंब तकनीकि सुधार करवाने का आग्रह किया है। इस आशय की मांग करने वालो में शिक्षक कांग्रेस के बालकृष्ण शर्मा, किशन रजक,महेश भार्गव, उमेश सिकरवार, कमल द्विवेदी, रामकुमार पाराशर, हरीश तिवारी, प्रमोद त्रिवेदी, रशीद खान, साबिर अली,राजेन्द्र गुजराती, भोलाराम शर्मा, कल्याण सिंह वर्मा ,धर्मेन्द्र सिंह, अशोक शुक्ला,राजेन्द्रसिंह जादौन शामिल है।

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