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12वीं के बाद 10वीं में भी जिला 20वें नंबर पर

3 वर्ष पहले
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सुधार: शिक्षकों की कमी दूर हो और लर्निंग लेवल सुधरे, तो ओर अच्छा सकते हैं बच्चे

10वीं में इस बार 41.99 फीसदी बच्चे पास हुए। पिछले साल 38.83 फीसदी रिजल्ट रहा था। पास प्रतिशत के मामले में यमुनानगर सिर्फ मेवात व पलवल से बेहतर रहा यानी प्रदेश में 20वें नंबर पर। 12वीं में भी यही हालात थे।

खराब रिजल्ट की 3 वजह

सरकारी स्कूलों में पीजीटी के 1467 पद 741 खाली पड़े

20 से 21 एक्टिविटीज शिक्षकों के जिम्मे, डाक का भी कार्य, स्कूलों में क्लर्क नहीं।

शिक्षा विभाग के सर्वे के मुताबिक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का लर्निंग लेवल 40 से 50 प्रतिशत तक ही मिला। यहां पर शिक्षकों के अलग-अलग संगठन हैं। इनमें से कई शिक्षक राज्य कार्यकारिणी से जुड़े हैं। समय-समय पर मांगों को लेकर यह हड़ताल भी करते रहते हैं।

परीक्षा दी- 16,512

पास 6,933(41.99 प्रतिशत)

लड़के 3339/9033 (36.96 प्रतिशत)

लड़कियां 3594/7479 (48.05 प्रतिशत)

समाधान के 3 तरीके

खराब रिजल्ट वाले स्कूलों व शिक्षकों पर कोई सख्ती हो।

शिक्षकों व मुखियाओं की जिम्मेदारी तय हो। उन पर नियमानुसार जुर्माना लगे या कार्रवाई हो।

लर्निंग लेवल बढ़ाया जाए और शिक्षकों के ऊपर से गैर शैक्षणिक भार कम हो।

(जैसा रिटायर्ड बीईओ सतीश गोयल व हरियाणा स्कूल एजुकेशन ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएस शर्मा से बातचीत हुई।)

ये स्कूल उदाहरण

राजकीय माध्यमिक विद्यालय टाेपरा कलां में शिक्षकों के 16 पद हैं, 7 खाली हैं। फिर भी रिजल्ट 92 प्रतिशत रहा है। साढ़ौरा में भी 9 पद हैं जबकि शिक्षक दो। वहां का रिजल्ट 21 प्रतिशत रहा है।

खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के शिक्षकों व स्कूल मुखिया से स्पष्टीकरण तलब किया जाता है। इस बार भी आंकलन करेंगे। आनंद चौधरी, डीईओ, यमुनानगर।

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