पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधरा बच्चों की संख्या भी दोगुनी हुई

स्कूल में शिक्षा का स्तर सुधरा बच्चों की संख्या भी दोगुनी हुई

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर शिक्षा विभाग को कोसने वाले शिक्षकों के लिए संजय कांबोज व उनकी प|ी एक उदाहरण हो सकते हैं। चनेटी के गवर्नमेंट स्कूल में कक्षा छह से आठ तक शिक्षक नहीं थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इससे संजय ने परेशानी प|ी आंचल से शेयर की। आंचल ने स्कूल पहुंचकर कक्षाएं लेना शुरू किया। हर रोज दस किमी का सफर तय कर वह पति के साथ स्कूल जाती। जहां 7 माह तक निशुल्क पढ़ाया। बाद में शिक्षा विभाग ने स्कूल की सुध ली, तो वहां पर नए शिक्षकों की तैनाती हुई। हालांकि अब भी छात्र मैडम आंचल के पढ़ाने के तरीके को मिस कर रहे हैं। स्कूल में पहले बच्चों की संख्या 52 रह गई थी, लेकिन पति-प|ी के मिलकर किए प्रयास से अब छात्र संख्या 105 हो गई है।

गांव भोगपुर कनालसी के रहने वाले संजय कांबोज चनेटी के गवर्नमेंट स्कूल में जेबीटी हैं। स्कूल में करीब 150 छात्र-छात्राएं हैं। पिछले साल स्कूल में शिक्षकों की कमी थी। प्राइमरी स्कूल के शिक्षक नरेश कुमार को ही मुख्य अध्यापक की जिम्मेदारी दी गई। बाद में वह भी रिटायर हो गए। सबसे बड़ी समस्या कक्षा छह से आठ तक के छात्रों की पढ़ाई नहीं हो रही थी। संजय ने एक दिन अपने घर पर जिक्र किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधरनी मुश्किल है। स्कूल में शिक्षक ही नहीं हैं। जिस पर आंचल ने कहा कि वह छात्रों को पढ़ा दिया करेगी। जिस पर संजय रोजाना सुबह अपनी प|ी आंचल को स्कूल में साथ ले जाने लगे।

अवनीश कुमार | यमुनानगर

स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर शिक्षा विभाग को कोसने वाले शिक्षकों के लिए संजय कांबोज व उनकी प|ी एक उदाहरण हो सकते हैं। चनेटी के गवर्नमेंट स्कूल में कक्षा छह से आठ तक शिक्षक नहीं थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इससे संजय ने परेशानी प|ी आंचल से शेयर की। आंचल ने स्कूल पहुंचकर कक्षाएं लेना शुरू किया। हर रोज दस किमी का सफर तय कर वह पति के साथ स्कूल जाती। जहां 7 माह तक निशुल्क पढ़ाया। बाद में शिक्षा विभाग ने स्कूल की सुध ली, तो वहां पर नए शिक्षकों की तैनाती हुई। हालांकि अब भी छात्र मैडम आंचल के पढ़ाने के तरीके को मिस कर रहे हैं। स्कूल में पहले बच्चों की संख्या 52 रह गई थी, लेकिन पति-प|ी के मिलकर किए प्रयास से अब छात्र संख्या 105 हो गई है।

गांव भोगपुर कनालसी के रहने वाले संजय कांबोज चनेटी के गवर्नमेंट स्कूल में जेबीटी हैं। स्कूल में करीब 150 छात्र-छात्राएं हैं। पिछले साल स्कूल में शिक्षकों की कमी थी। प्राइमरी स्कूल के शिक्षक नरेश कुमार को ही मुख्य अध्यापक की जिम्मेदारी दी गई। बाद में वह भी रिटायर हो गए। सबसे बड़ी समस्या कक्षा छह से आठ तक के छात्रों की पढ़ाई नहीं हो रही थी। संजय ने एक दिन अपने घर पर जिक्र किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधरनी मुश्किल है। स्कूल में शिक्षक ही नहीं हैं। जिस पर आंचल ने कहा कि वह छात्रों को पढ़ा दिया करेगी। जिस पर संजय रोजाना सुबह अपनी प|ी आंचल को स्कूल में साथ ले जाने लगे।

चनेटी स्कूल में शिक्षक कम होने से पिछड़ रहे थे बच्चे, टीचर की प|ी ने 7 माह फ्री पढ़ाया, अब सरकार ने भेजे नए टीचर्स

चनेटी स्कूल में शिक्षक कम होने से पिछड़ रहे थे बच्चे, टीचर की प|ी ने 7 माह फ्री पढ़ाया, अब सरकार ने भेजे नए टीचर्स

एमफिल, एमए बीएड हैं आंचल

आंचल एमफिल, एमए, बीएड हैं। उनका शिक्षक बनने का सपना है। जिसकी तैयारी भी कर रही हैं। आंचल के फेवरेट सब्जेक्ट हिंदी व संस्कृत हैं, लेकिन वह अन्य विषय भी छात्रों को पढ़ाती हैं। संजय व आंचल की बेटी और उनके भाई का बेटा भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ाते हैं। उनका मानना है कि जब तक हम अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं भेजेंगे। तब तक सरकारी स्कूलों की पढ़ाई के लिए हम गंभीर नहीं होंगे।

खबरें और भी हैं...