शहर के लोगों को एक दूसरे के और करीब लाने, उन्हें खेल-खेल में स्वस्थ रहने का संदेश देने के उद्देश्य से पहली बार सरकारी स्तर पर रविवार को राहगीरी का आयोजन किया गया। नेहरू पार्क यमुना क्लब से लेकर परशुराम चौक की तरफ की सड़क को पुलिस द्वारा नो ट्रैफिक जोन बनाया गया। राहगीरी का समय सुबह छह बजे से रखा गया था पर बच्चे व युवा इससे पहले ही सड़क पर पहुंच गए। शहर के इस उत्साह में विधायक घनश्यामदास अरोड़ा व एसपी राजेश कालिया ने भी साथ दिया। दोनों ने जहां भंगड़ा किया। एसपी ने साइकिल चलाई तो विधायक ने रक्षक अकेडमी के युवाओं के साथ टायर उठाकर दम दिखाया। रोटरी जगाधरी के सदस्यों ने व्यवस्था में काफी सहयोग दिया।
यमुना क्लब के बाहर बने स्टेज के पास में म्यूजिक की मस्ती के साथ एक्सरसाइज करवाई गई तो वहीं भंगड़ा भी हुआ। इसके आगे बच्चों ने योगा का प्रदर्शन किया तो डीपीएस के विद्यार्थियों ने डांस की प्रस्तुत से सभी का ध्यान खींचा। छोटे-छोटे बच्चे कराटे का प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं उनके बगल में ही फुटबाल की प्रैक्टिस चली। कुछ कदम चलते ही तलवारबाज अपने करतब दिखा रहे थे। आखिरी में कुश्ती का मैट बिछाया गया था। इस पर युवा व बच्चे जोर आजमाइश करते दिखे।
पुलिस विभाग को दी गई है। साथ ही दूसरे विभागों को भी कोआर्डिनेशन के लिए कहा गया है। लेकिन रविवार के पहले कार्यक्रम में प्रशासनिक टीम से कोई नहीं दिखा। पता करने पर बताया गया कि पुलिस विभाग ने किसी को बुलाया ही नहीं था। इसलिए वे नहीं पहुंचे। खुद विधायक घनश्यामदास अरोड़ा ने कहा कि उन्हें इस तरह के आयोजन की कोई जानकारी नहीं थी। उनके घर के पास ही कार्यक्रम हो रहा था। सुबह जब इस बारे में पता चला तो वे लोगों के बीच पहुंचे।
एसपी कालिया ने भंगड़ा किया
यमुनानगर | राहगीरी कार्यक्रम में एसपी राजेश कालिया ने पहले अकेले ही भंगड़ा शुरू कर दिया। फिटनेस क्लब के कुछ युवाओं ने बाद में उनका साथ दिया।
विधायक भी लोगों के साथ नाचे
यमुनानगर | राहगीरी कार्यक्रम में एसपी के जाने के बाद विधायक घनश्याम दास अरोड़ा पहुंचे। पंजाबी गानों पर डांस कर रहे बच्चों के बीच उन्होंने भी डांस किया। इसके बाद शहरवासियों ने भी उनका साथ दिया।
मजबूरी में सड़क पर फेंकी खाली बोतलें
कार्यक्रम में भाग लेने वालों के लिए पुलिस विभाग की तरफ से पेयजल का इंतजाम किया गया था। लगातार चले अभियान से लोग स्वच्छता के प्रति जागरूक हुए हैं। इसलिए पानी पीने के बाद वे खाली बोतलें डालने के लिए डस्टबिन तलाशते नजर आए। जब डस्टबिन नहीं दिखे तो सड़क किनारे ही बोतलें डाल दीं जो हवा में बिखरती रहीं।