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चलना एक बात है पहुंचना दूसरी, कोल्हू का बैल घूमता बहुत है, पहुंचता कहीं नहीं : संदीप ओबराय

3 वर्ष पहले
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संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत पावन अवतारणवाणी के शबद गायन से हुई। सत्संग में प्रवचन संदीप ओबेरॉय ने किया। प्रवचन करते हुए संदीप ओबराॅय ने कहा कि संसार में जो भी सुख है वो क्षणभंगुर है। सच्चा सुख तो भक्ति में ही है। उन्होंने बताया कि गुरसिख सतगुर को आधार मानकर सारी सेवाएं करता है जिस तरह एक एजेंट अपनी कम्पनी का प्रोडक्ट कम्पनी का नाम लेकर ही बेचता है।

अगर कम्पनी पीछे से प्रोडक्ट देना बंद कर दे तो एजेंट की क्या हालत होगी। इसी तरह यह स्टेज भी सतगुरू की है और गुरसिख को जो भी प्राप्त होता है उसमें सतगुरु का ही आशीर्वाद होता है। उन्होंने कहा कि चलना एक बात है पहुंचना दूसरी बात है। जिस प्रकार एक कोल्हू का बैल घूमता बहुत है, परंतु कहीं पहुंचता नहीं है। ज्ञान दे बाझों कर्म कमाना मालक बाझ मजूरी है। अगर मै वकालत का अभ्यास करता हूं तो ही वकील की डिग्री का और अगर डाक्टरी का अभ्यास कर रहा हूं तभी डाक्टर की डिग्री का फायदा है। इसी तरह अगर सत्संग आ रहा हैं तो सत्संग से जो सीखा है वो कर्मों में होना चाहिए। हो सकता है मै सत्संग में भी कम आता हूं परंतु सत्संग से जो सिखलाई मिल रही है वो कर्मों में है तो भी मुबारक है। उन्होंने कहा कि हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।

उदाहरण देते हुए बताया कि निरंकारी सतगुरु माता सविन्द्र हरदेव ने अपने विचारों में बताया कि एक अध्यापक बच्चों को सफेद कपड़ा दिखाता है, जिस पर एक छोटा से काला धब्बा होता है। उस पर निबंध लिखने को कहता है ज्यादातर बच्चे काला दाग पर निबंध लिखते हैं। कहने का भाव हमारी नजर अवगुण पर टिकती है किसी में अगर जितने भी गुण हो परंतु उसके एक अवगुण पर हमारे भाव उसके लिए बदल जाते है और नकरात्मक सोच हो जाती है। हमें सबके गुण देखने हैं जो हम खोजते है, सोचते है वैसे ही हमारे भाव बन जाते है और हम वैसे ही बन जाते है।

यमुनानगर | संत निरंकारी सत्संग भवन में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया।

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