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पोस्ट आॅफिस में नापतोल के पैकेट्स आने से लेटर्स की डिलीवरी में देरी

अगर आप जीरकपुर में रह रहे हैं और आपका कोई जरूरी दस्तावेज पोस्टल सर्विस से आना है तो इसके लिए आप डाकिए का इंतजार न...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 02:05 AM IST

पोस्ट आॅफिस में नापतोल के पैकेट्स आने से लेटर्स की डिलीवरी में देरी
अगर आप जीरकपुर में रह रहे हैं और आपका कोई जरूरी दस्तावेज पोस्टल सर्विस से आना है तो इसके लिए आप डाकिए का इंतजार न करें। पोस्ट ऑफिस जाकर वहां पड़े पार्सल के ढेर में अपने आप छांटे। हो सकता है आपको अापका पत्र मिल जाए। अगर डाकिए के भरोसे रहेंगे तो इसके लिए आपके पास इसे आने में कई दिन लग सकते हैं। अमुमन, 10 दिन से या 20 दिन भी लग सकते हैं। इसके बाद भी पत्र मिल जाए यह आपकी किस्मत है। यहां ऐसा ही हो रहा है। शिवालिक विहार में बनाए गए शहर के सबसे मुख्य सब पोस्ट ऑफिस में लगे ढेर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की हालत क्या हो रही है।

स्नेपडील के बड़े पैकेट्स में डाक रह जाती है दबी : यहां इस सब पोस्ट ऑफिस में नापतोल ऑनलाइन कंपनी के बड़े-बड़े पार्सल पैकेट, जिनका वजन 10 किलो से लेकर 40 किलों तक होता है। यहां रोजाना 50 से ज्यादा बंडल आ रहे हैं। इनके बीच शहर के लोगों के रजिस्ट्री पत्र व अन्य जरूरी चिट्टी दबी रह जाती है। जो समय से डिलीवर नहीं हो रही है। आलम यह है कि खुद पोस्ट मास्टर व अन्य स्टाफ को बैठने तक की जगह नहीं बचती है। पब्लिक विंडो पर भी स्नेपडील के इन बंडलों का ढेर लगा ही रहता है। रोजाना इनको यहां लाया जाता है। रोजाना हटाया जाता है। इसमें कर्मचारियों को बाकी कामों के लिए समय ही नहीं मिलता है। इसलिए, लोगों के लेटर्स समय पर डिलीवर नहीं होते हैं।

नापतोल के कारण कोई परेशानी नहीं है। हमने वहां और भी जगह ले ली है। जल्दी सारा काम सिस्टम में आ जाएगा।

-प्रेम चंद पाल, सुपरिंटेंडेंट हेड क्वाटर्स पोस्टल विभाग चंडीगढ़

कम पोस्टमैन होने से हो रही ज्यादा देरी

यह सब पोस्ट ऑफिस पहले पटियाला चौक के पास होता था। यहां से शिफ्ट होकर इसे शिवालिक विहार में वहां पर चला दिया गया है। इस पोस्ट ऑफिस में 4 पक्के पोस्टमैन हैं। बाकी 10 टेंपरेरी बेस्ड लोग इस काम से जुड़े हैं। 50 से ज्यादा कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स के लिए कम पोस्टमैन हैं। इसलिए, पब्लिक परेशान हो रही है।

पब्लिक का सवाल

मेरा एक पत्र न्यूजीलैंड से आना था। मैं कई दिनों से यहां के चक्कर काट रहा हूं। मैने रिकाॅर्ड चेक किए तो वह लेटर यहां पर पहुंच चुका था। लेकिन, कई दिनों से यह लेटर मुझे नहीं मिला। लेकिन, आज शुक्रवार को मुझे यह लेटर मिला, जिसे अब देरी हो चुकी है। ऐसा ही मेरी बहन का भी एक रजिस्ट्री पत्र यहां फंस गया है। पोस्ट ऑफिस कम और यह नापतोल कंपनी का गोदाम ज्यादा लगाता है। यहां इंटरव्यू लेटर से लेकर वीजा के दस्तावेज तक पड़े हैं। इनके पास स्टाफ नहीं कि जो इसे छांटकर दे सके।

- संदीप कुमार, निवासी ग्रीन एन्क्लेव जीरकपुर

मेरी बेटी के पासपोर्ट के कुछ दस्तावेज आने हैं। लेकिन, हम रोजाना इंतजार कर रहे हैं, पर नहीं मिल रहा है। अब डाकिए को फोन किया है। वह आएगा तो पता करेगा। अभी कुछ पता नहीं कि किस ढेर में पड़ा है। -सरिता सिंह

यहां नापतोल के रोजाना 50 से ज्यादा पैकेट्स आते हैं। ऐसे में लेटर्स के कुछ पैकेट्स यहां बढ़ जाते हैं। हमारी कोशिश है कि हरेक व्यक्ति को समय पर उनकी डाक पहुंचाई जाए। लोगों के लेटर्स मिलने में इसलिए देरी हुई है कि पिछले कई दिनों से हड़ताल के कारण डाकिए डाक डिलीवर नहीं कर रहे थे। अब यह काम शुरू हो गया है। -पुष्पा शर्मा, पोस्टमास्टर जीरकपुर

लेटर्स देरी से पहुंचने पर हो सकता है नुकसान...

यहां पड़े लेटर्स के इस ढेर में कई बच्चों के जॉब लेटर्स भी हो सकते हैं। अगर एक बार समय निकल गया तो कई युवाओं को नौकरी से भी हाथ धाेना पड़ सकता है। इसलिए, यहां कर्मचारी बढ़ाकर व जगह बढ़ाकर इसमें सुधार करने की सख्त जरूरत है।

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