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छतबीड़ जू में 33 दिन के विजिट पर आए अंडर ट्रेनी अफसरों ने देखा वॉक-इन-एवेरी को

छतबीड़ जू में वाइड लाइफ के बारे में जानने के लिए तेलंगाना वन एकेडमी से 64 ट्रेनी रेंज ऑफिसर यहां आए हैं। तेलंगाना के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 02:05 AM IST

छतबीड़ जू में 33 दिन के विजिट पर आए अंडर ट्रेनी अफसरों ने देखा वॉक-इन-एवेरी को
छतबीड़ जू में वाइड लाइफ के बारे में जानने के लिए तेलंगाना वन एकेडमी से 64 ट्रेनी रेंज ऑफिसर यहां आए हैं। तेलंगाना के डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर बी वी राओ के नेतृत्व में 64 ट्रेनी रेज अफसरों ने छतबीड़ चिड़ियाघर में कई जानवरों के बारे में जानकारी हासिल की। जू के फारेस्ट ब्लाॅक अफसर हरपाल सिंह ने सभी ट्रेनी अफसरों के साथ ट्रैकिंग करते हुए गाइड बनकर उन्हें विभिन्न बाड़ों में रखे गए जानवरों के बारे में विस्तार से जानवरों की आदतों और उनकी संभाल के बारे में जानकारी दी।

बारिश के कारण मौसम में ठंडक से सभी जानवर अपने बाड़ों में आराम से घूमते मिले। अंडर ट्रेनी अफसरों को सबसे ज्यादा दिलचस्पी चिड़ियाघर में नए बनाए वॉक-इन-एवेरी को जानकर हुई। हरपाल सिंह ने बताया कि भारत की सबसे लंबी 300 मीटर वॉक इन एवेरी को पूर्णता जू में मौजूद कर्मचारियों की मदद से महज 53 लाख रुपए में बनाया गया है। जिसके निर्माण के लिए आॅर्किटेक्ट करोड़ों रुपए मांग रहे थे।

इस दौरान तेलंगाना वन एकेडमी के डीएफओ ने बताया कि एकेडमी से 64 अंडर ट्रेनी रेज अफसर, जोकि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मिजोरम, पश्चिमी बंगाल व तेलंगाना वन विभाग से हैं। 33 दिन के स्टडी टूर पर यहां आए हैं, जो हैदराबाद से चलकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश से होते हुए अब तक वाया रोड से 1800 किलोमीटर रास्ता तय कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इन रेज अफसरों की ट्रेनिंग 18 महीने की है जो पासआउट होने पर भारत के वन विभाग में विभिन्न जगहों पर तैनात होंगे। अभी तक उन्होंने कई चिड़ियाघर देखे हैं। लेकिन, वॉक-इन-एवेरी पहली बार देखी। उन्होंने छतबीड़ चिड़ियाघर प्रबंधन की वॉक-इन-एवेरी बनाने के लिए प्रशंसा करते हुए कहा की उन्हें छतबीड़ चिड़ियाघर का प्रबंध देखते हुए वन कर्मी होने पर गर्व महसूस हो रहा है।

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