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मेन पावर सप्लायर से बिजली मिलने पर भी शहर में लग रहे कई बार पावर कट

चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली इन तीनों शहरों के साथ जीरकपुर एक चाैथा शहर खड़ा हो गया है। जीरकपुर को छोड़कर बाकी तीनों...

Danik Bhaskar | Jun 18, 2018, 02:05 AM IST
चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली इन तीनों शहरों के साथ जीरकपुर एक चाैथा शहर खड़ा हो गया है। जीरकपुर को छोड़कर बाकी तीनों शहरों में अंाधी-तूफान और बारिश में बिजली पावरकट कम ही लगते हैं। गर्मी बढ़ने पर भी कटौती ना के बराबर होती है। जीरकपुर ही एेसा एक शहर है, जहां रोजाना कटौती हो रही है। वो भी तब जब मेन पावर सप्लायर से बिजली लगातार मिल रही है। एक भी शेड्यूल कट नहीं लगाया जा रहा है। फिर शहर के अंदर ही क्यों कटौती हो रही है। इसके पीछे लोग पावरकाॅम को ही दोषी मान रहे हैं। लेकिन, बिजली न मिलने में बड़ा हाथ यहां की नगर परिषद, पंजाब सरकार के लोकल बाॅडीज विभाग का भी है। इसके साथ वे पॉलिसी मेकर भी जवाबदेह हैं, जिन्होंने धड़ाधड़ अवैध कॉलोनियों को बसने का मौका दिया है। अब पावरकाॅम कोशिश कर रहा है कि यहां जो जगह सब स्टेशन के लिए चुनी है। उसमें कोई रुकावट न हो। रुकावट न हुई तो इस साल नया सब स्टेशन लग जाएगा। तब बिजली की ओवरलोडिंग भी कम होगी और बिजली कटौती भी नहीं होगी।

जीरकपुर का हाल तो इतना खराब है कि अगर किसी कॉलोनी में बिजली की ओवरलोडिंग के लिए नया टांसफार्मर लगाना हो। तो कहीं भी ट्रांसफार्मर लगाने की जगह जल्दी से नहीं मिलती है। दर्जनों बार ऐसा हो चुका है कि ट्रांसफार्मर वापस बिजली ऑफिस में पहुंच जाता है। ट्रांसफार्मर तो दूर बिजली के खंभे तक गाड़ने की जगह नहीं है। ऐसी कॉलोनियां एमसी के अधिकारियों ने प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर बसाई हैं। इनके नक्शे पास किए हैं। आज जो यहां घर ले रहे हैं, उनको बिजली नहीं मिल रही है और पानी भी नहीं मिल रहा है।

2014 में सब स्टेशन के लिए जमीन खरीदी पर नहीं हो सका काम शुरू : पावरकाॅम ने जीरकपुर पंचकूला रोड पर पारस डाउन टाउन मॉल के नजदीक सब स्टेशन लगाने के लिए करीब एक करोड़ खर्च कर जमीन खरीदी थी। बाद में उस जमीन का मामला अदालत में चला गया। इसलिए, आज तक यहां बलटाना एरिया के लिए सब स्टेशन नहीं लगा। इसके लिए मुबारकपुर से लेकर जीरकपुर तक टावर भी खड़े किए गए हैं। कई करोड़ खर्च होने के बाद भी यहां सब स्टेशन नहीं लगा। अब एक और जगह देखी गई है। उसका मामला भी अभी साफ नहीं है कि यहां सब स्टेशन बनेगा या नहीं। इसलिए अभी ओवरलोडिंग कम नहीं होगी। जब तक दो नए सब स्टेशन नहीं बन जाते, तब तक यहां बिजली कटौती झेलनी पड़ेगी।

क्या कहा लोगों ने

हां यह सच है कि यहां ट्रांसफार्मर लगाने के लिए पावरकाॅम के कर्मचारियों को जगह ही नहीं मिलती है। कोई भी अपने प्लाॅट, घर के बाहर, दुकान के पास ट्रांसफार्मर लगाने नहीं देता है। यहां सड़कें 15 से 25 फुट क चौढ़ी हैं। कुछ ही कॉलोनियों में 35 फुट रोड होंगी। 80 प्रतिशत कॉलोनियों में सड़कों पर ही पोल व ट्रांसफार्मर लगे हैं। ऐसे में ओवरलोडिंग रोकने के लिए नए ट्रांसफार्मर लगाने की जगह नहीं मिलती है। -मनीष कुमार


बिना प्लानिंग के एमसी ने बसाया शहर... जीरकपुर में निकाय विभाग के अधिकारियों, यहां की नगर परिषद ने बुनियादी जरूरतों, खासकर बिजली को लेकर कोई प्लानिंग नहंीं की है। न तो यहां सब स्टेशन बनाने की जगह छोड़ी है और न ही बिजली लाइनों व टांसफार्मर लगाने के लिए कोई जगह छोड़ी गई है। प्रॉपर्टी डीलरों ने एक-एक इंच जगह बेचकर मुनाफा कमाया है। इसमें नक्शे पास करने वाली एमसी और इसके अधिकारियों ने भी नहीं सोचा कि इस शहर में बिजली सिस्टम के लिए भी कुछ करना है।