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होर्डिंग्स की भरमार: कंपनियां दुकानों पर विज्ञापन बोर्ड लगाकर बचा रही हैं पैसे

नगर कांउसिल को चकमा देकर कंपनियां दुकानों पर विज्ञापन बोर्ड लगाकर जहां पैसे बचा रही हैं। वहीं विज्ञापन बोर्ड के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 01, 2018, 02:05 AM IST

होर्डिंग्स की भरमार: कंपनियां दुकानों पर विज्ञापन बोर्ड लगाकर बचा रही हैं पैसे
नगर कांउसिल को चकमा देकर कंपनियां दुकानों पर विज्ञापन बोर्ड लगाकर जहां पैसे बचा रही हैं। वहीं विज्ञापन बोर्ड के जरिये निगम को मिलने वाला रेवेन्यू भी नहीं दिया जा रहा है। दुकानों व शोरूमों पर विज्ञापन लगाने की ऐसी होड़ लगी है कि कई दुकानों पर तो विज्ञापन के बोर्ड ऐसे लगाए गए हैं कि उसकी खिड़कियां तक दिखाई नहीं देती। इस होर्डिंग पॉल्यूशन को रोकने में नगर कांउसिल नाकाम है। यह सभी विज्ञापन हाईकोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार हर दुकानदार अपनी दुकान की चौड़ाई के अनुसार तीन फुट ऊंचा बोर्ड लगा सकता है, उस पर वो सिर्फ अपनी दुकान का नाम ही लिख सकता है। लेकिन जीरकपुर में इस नियम का पालन न दुकानदार कर रहे हैं और न ही कांउसिल इस नियम को लागू करवा पा रही है।

कांउसिल को देने पड़ते हैं पैसे, दुकान की आड़ में फ्री होर्डिंग : शहर में विज्ञापन का ठेका दिया हुआ है। कंपनियाें को विज्ञापन लगाने के लिए भारी भरकम फीस कॉन्ट्रैक्टर्स को देनी पड़ती है। इसी फीस को बचाने के लिए लोगों की रोजाना की जरूरत के सामान से जुड़ी कंपनियां दुकानों का सहारा ले रही हैं। कंपनियों द्वारा दुकानों पर अपनी कंपनी का बोर्ड लगाया जाता है और उसके नीचे छोटे अक्षरों में दुकान का नाम लिखा होता है। पूरे बोर्ड के 98 फीसदी हिस्से पर कंपनी के विज्ञापन का कब्जा होता है जबकि दो फीसदी हिस्सा दुकान के नाम के लिए छोड़ा होता है। कई जगह तो दुकान का नाम भी नहीं होता।

नेशनल हाईवे किनारे शोरूमों पर विज्ञापनों की भरमार : कंपनिया ज्यादातर होर्डिंग्स लगाने के लिए दुकानों व शोरूमों को सड़कों के किनारे चुनती हैं। नेशनल हाईवे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कोई भी बड़ा होर्डिंग या बोर्ड नहीं लगाया जा सकता। हाईवे से 100 मीटर की दूरी पर बोर्ड लगाने की अनुमती है, लेकिन शहर के अंदर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के किनारे बनी दुकानों पर होर्डिंग्स की ऐसी भरमार है कि कई शोरूम तो किसी बड़े होर्डिंग का रूप ही धारण कर चुके हैं क्योंकि इन पर एक के बाद एक कई कंपनियों के बोर्ड लगे हुए हैं।

दुकान के नाम का 3 फुट का बोर्ड लगा सकते हैं

पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट के तहत कोई भी दुकानदार अपनी दुकान पर तीन फुट ऊंचा बोर्ड लगा सकता है। यह बोर्ड दुकान के फ्रंट की चौड़ाई के बराबर का भी हो सकता है और इसका साइज नगर कांउसिल ही निर्धारित कर सकती है। इस बोर्ड पर सिर्फ दुकान का नाम व दुकानदार का एड्रेस ही लिखा जाना अनिवार्य है। इसके अलावा किसी प्रकार की कोई अन्य चीज या सामग्री बोर्ड पर नहीं लिखी जा सकती है।

आग लगने पर बोर्ड बनते हैं बाधा...

शोरूम की सभी मंजिलों के बाहर होर्डिंग्स ऐसे लगाए जाते हैं कि अंदर से हवा व रोशनी का आवागमन भी बंद हो जाता है। अगर किसी ऐसी इमारत में आग लगती है तो उसे बुझाने के लिए भी फायर कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। पहले इन बोर्ड व होर्डिंग्स को हटाना पड़ता है। उसके बाद ही इमारत की ऊपरी मंजिलों में आग बुझाने के लिए पानी की बौछारंे पहुंच पाती हैं। कांउसिल की ओर से अगर ऐसी इमारतों पर कार्रवाई नहीं की गई तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है और रेवेन्यू का नुकसान बचाने के लिए होर्डिंग्स व बोर्ड्स को हटाना जरूरी है।

मोहाली में नगर निगम ने की थी कार्रवाई

जीरकपुर की तरह मोहाली व खरड़ एरिया में भी कंपनियों की ओर से शहर में दुकानों के बाहर बड़े बड़े बोर्ड्स लगा कर विज्ञापन किया गया था, लेकिन बाद में मोहाली में नगर निगम की ओर से कार्रवाई करते हुए दुकानों से यह बोर्ड उतार दिए गए थे। इसके अलावा खरड़ में भी नेशनल हाईवे 21 पर नगर कांउसिल की ओर से दुकानों के बाहर लगे ऐसे बड़े बड़े बोर्ड्स को कांउसिल ने ढकवा दिया था और उसके बाद विज्ञापन फीस जमा करवा ही कवर को हटवाया गया था।

दुकानों पर कंपनियों के बोर्ड लग रहे हैं, इसको लेकर कार्रवाई की जाती है। जहां-जहां बड़ी कंपनियों के बोर्ड लगे हैं, उन्हें हटाया जाएगा। कंपनियां दुकानदार के साथ मिल कर ऐसा काम करती हैं। इसे रोका जाएगा और नियमों के अनुसार बोर्ड लगाए जाएंगे।

-मनबीर सिंह गिल, कार्यकारी अधिकारी, नगर कांउसिल जीरकपुर

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