जीरकपुर| बलटाना के शिव एन्क्लेव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के बारे में बताया गया। कथा व्यास आचार्य बलराम महाराज ने सहज शब्दों में भागवत का महत्व बताया।
कंस वध का वर्णन भी किया गया। आचार्य बलराज महाराज ने कहा कि जब रुकमणि विवाह योग्य हुई तो उनके पिता भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। लोग रुकमणि के पास आते तथा कृष्ण की प्रशंसा करते। रुकमणि ने निश्चय किया कि वे विवाह करेंगी तो श्रीकृष्ण से ही करेंगी। रुकमणि के भाई को यह बात मंजूर नहीं थी, क्योंकि वह श्रीकृष्ण से बैर रखता था। वह उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था।
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