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स्टूडेंट्स के लिए न पानी, न पूरे कमरे, बरामदे में पढ़ा रही टीचर्स

सरकारी प्राइमरी स्कूलों में प्री नर्सरी क्लासेज शुरू करने और एजुकेशन के लिए बेहतर माहौल देने के पंजाब सरकार के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 02:10 AM IST

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    सरकारी प्राइमरी स्कूलों में प्री नर्सरी क्लासेज शुरू करने और एजुकेशन के लिए बेहतर माहौल देने के पंजाब सरकार के दावे की हकीकत कुछ और ही है। यह देखना हो तो राजधानी से 15 किलोमीटर की दूरी पर ही इसको देखा जा सकता है। आपके सामने सारी हकीकत आ जाएगी।

    यहां जीरकपुर के किशनपुरा में सरकारी प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए पीने के पानी का एक नल तक नहीं लगाया गया है। कई साल पहले यहां हैंड पंप जरूर होता था, लेकिन अब वह किसी काम का नहीं है। उसके अंदर पानी नहीं है। इसलिए यहां पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स ने कहा कि गर्मी के इस मौसम में बच्चों को बिना पानी के जान का खतरा है। एक बार घर से पानी की बोतल ले जाकर बच्चे दिन में कुछ समय गुजारा करते हैं, लेकिन अगर और पानी चाहिए तो स्कूल के पास के किसी घर से पानी मांगकर लाते हैं।

    क्यों है यह जिले का सबसे बदहाल स्कूलों में से एक: पेरेंट्स मनिंदर सिंह ने कहा कि यह स्कूल इतने खस्ताहाल में है कि यहां पिछले महीने तक बिजली तक नहीं थी। अब यहां एक महीने पहले की बिजली का कनेक्शन लगा है। तब जाकर यहां पंखे चल पा रहे हैं। इससे पहले यहां बच्चे गर्मी में बिना पंखे के ही बैठते थे। ऐसे माहौल में बच्चे कैसे पढ़ पाएंगे यह सोचने की बात है।

    पेरेंट्स सुरिंदर सिंह ने कहा कि बच्चे स्कूल से घर पर आकर शिकायत करते हैं कि स्कूल में पीने के लिए पानी नहीं है। क्लासरूम में भी बैठने की जगह नहीं है। 5 क्लासेज के लिए दो कमरे हैं। इसलिए तीन क्लासें बरामदे में ही लगती हैं। यहां पानी न होने से बच्चे टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते। शिक्षा विभाग स्कूल के बच्चों से स्वच्छ भारत के नारे तो लगवाता है पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए खुद कितना काम करता है। यह इस स्कूल में आकर देखा जा सकता है।

    अभी नई ज्वाइनिंग है, इसकी जानकारी नही: मेरी अभी हाल ही में अपने पद पर नई ज्वाइनिंग की है। इसलिए मुझे इसकी जानकारी नहीं है कि इस सरकारी स्कूल की ऐसी हालत क्यों है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और स्कूल की हालत सुधारी जाएगी।

    -गुरप्रीत कौर, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, मोहाली

    क्या कहा हेड टीचर और डिप्टी डीईओ ने

    बिजली का कनेक्शन पिछले महीने मई में लगा दिया है। पानी के लिए बच्चे घर से पान की बोतल लाते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो स्कूल के पास के घर से लाते है। मैने इस स्कूल को दो साल पहले ज्वाॅइन किया है। हर साल ऑनलाइन स्कूल के बारे में अधिकारियों को बताने के लिए फार्म भरा जाता है। वह मैने भर दिए है। -किरनदीप, हेड टीचर

    पिछले साल सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल की डेवलपमेंट के लिए कोई फंड नहीं आया है। इसलिए स्कूलों को कुछ नहीं दे सके। वहां की टीचर्स ने यह मांग की है कि नहीं, इस बात की भी जांच की जाएगी। पानी को हरेक स्कूल में होना ही चाहिए।

    -संतोष कुमारी, डिप्टी डीईओ मोहाली

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