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छतबीड़ जू में दिल्ली के अभय से मिलकर शेरनी हेली को मिला था एक नया जीवन

संवेदनशील इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी होते हैं। उनके जीवन में भी कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब उनकी बचने की उम्मीद कम...

Danik Bhaskar

Jun 28, 2018, 02:10 AM IST
संवेदनशील इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी होते हैं। उनके जीवन में भी कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब उनकी बचने की उम्मीद कम ही होती है। लेकिन, किसी का साथ पाकर वे दोबारा से नए जीवन की शुरुआत करते हैं। ऐसी ही एक कहानी यहां छतबीड़ जू की शेरनी हेली की है।

दो शावक दिए गए दिल्ली जू को: छतबीड़ जू से दिल्ली जू में हेली के दो बच्चे ‘ब्रीडिंग लोन’ के तहत भेजे गए। दिल्ली जू के शेर अभय को छतबीड़ जू में लाया गया था। इसलिए, दिल्ली जू को दो शावक भेजे गए हैं।

अभय के यहां आने से एक शेरनी हेली के चार बच्चे हुए थे। उनमें से दो दिल्ली के जू को दे दिए गए हैं। इस प्रॉसेस को ‘ब्रीडिंग लोन’ कहा जाता है।

दो बच्चे छतबीड़ जू में ही रहेंगे: 2 बच्चे तो दिल्ली जू को वापस भेज दिए गए और दो बच्चे जीरकपुर के छतबीड़ जू में ही रहेंगे। लेकिन, उन दो में से एक बच्चा सरवाइव नहीं कर पाया। अब एक ही बच्चा जो बड़ी शेरनी बन गई है, हेली के साथ जू में ही है। उसका नाम हीर रखा गया है। हीर इस समय 6 साल की है।

इस समय चार शेर है जू में: छतबीड़ जू में एक मेल शेर और 3 फीमेल हैं। मेल शेर का नाम युवराज है और वो किंग ऑफ द जू भी है। हेली, हीर और शिल्पा तीन फीमेल शेरनियां जू में ही हैं। शिल्पा और युवराज हेली के परिवार से नहीं है।

दिल्ली से बुलाया गया था छतबीड़ में अभय नाम का शेर

छतबीड़ जू के कर्मचारियों ने दिल्ली जू से संपर्क किया और वहां से एक मेल शेर को जीरकपुर के छतबीड़ जू में लाया गया था। उसका नाम अभय था और जिसकी मुलाकात हेली नाम की शेरनी से हुई थी। जू में अभय के आते ही शेरनी हेली ठीक होने लग गई थी। जिस वजह से इनमें आपस में एक-दूसरे से प्यार हो गया व कुछ दिनों बाद दोनों के चार शावक भी हुए।

करीब 6 साल पहले हेली नाम की शेरनी थी बीमार

करीब 6 साल पहले छतबीड़ जू की हेली नाम की शेरनी बीमार थी। उसकी बचने की उम्मीद कम ही लगाई जा रही थी। वह उस समय तीन साल की थी। हेली काे पैरालाइसिस हो गया था। हेली के पैरों ने भी काम करना बंद कर दिया था। हेली ने खाना-पीना सब छोड़ दिया था और डॉक्टर ने भी आस छोड़ दी थी की हेली अब जीवित नहीं रह पाएगी। जिसके लिए छतबीड़ जू प्रबंधन ने कोशिश की थी।

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