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डेढ़ लाख रुपए में बेचता था 12वीं का सर्टिफिकेट

पहले मोहाली और अब जीरकपुर में जाली सर्टिफिकेट बनाने का धंधा जोरों पर चल रहा था। मोहाली में मटौर पुलिस ने सैकड़ों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 03, 2018, 02:10 AM IST

डेढ़ लाख रुपए में बेचता था 12वीं का सर्टिफिकेट
पहले मोहाली और अब जीरकपुर में जाली सर्टिफिकेट बनाने का धंधा जोरों पर चल रहा था। मोहाली में मटौर पुलिस ने सैकड़ों की तादात में जाली सर्टिफिकेट्स सहित गिरोह को पकड़ा। जोकि पैरा मेडिकल के नाम पर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में अपना धंधा कई साल से चला रहे थे। पंजाब की स्पेशल स्टेट ऑप्रेशन सेल इंस्पेक्टर गुरचरण सिंह ने फेज-7 मार्केट में खुले पेरा मेडिकल इंस्टिट्यूट पर छापा मार गैंग को पकड़ा। अब मोहाली जिले में जीरकपुर शहर में यह गैंग सक्रिय है और जीरकपुर पुलिस ने रविवार को लोहगढ़ स्थित डीएबी इंस्टिट्यूट संचालक अश्वनी कुमार को पकड़ा है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है। जीरकपुर पुलिस को संगरूर के रहने वाले युवक नितेश मोहन ने शिकायत दी थी। उसने पुलिस को बताया कि पता चला कि जीरकपुर में लोहगढ़ रोड पर एक डीएबी के नाम इंस्टिट्यूट खुला है। वहां पर पैसे लेकर 10वीें व 12वीं का सर्टिफिकेट मिल जाता है। पीड़ित गत दिनों संचालक प्रीत कॉलोनी जीरकपुर निवासी अश्वनी कुमार ने मिला। अश्वनी ने दिल्ली के आईएससीई बोर्ड से 12वीं का सर्टिफिकेट तैयार करने की बात की और इसके लिए डेढ़ लाख रुपए मांगे। यही नहीं यह सर्टिफिकेट ऑन लाइन भी शो होना था। इसलिए पीड़ित ने उसको 80 हजार रुपए में रुप में पहली किश्त दे दी और अगली किश्त 70 हजार सर्टिफिकेट ऑन लाइन शो होने पर देने का वायदा किया। आरोपी ने पीड़ित को सर्टिफिकेट की एक कॉपी तैयार कर दे दी लेकिन ऑन लाइन यह सर्टिफिकेट शो नहीं हुआ। जिस पर पीड़ित ने जीरकपुर पुलिस में शिकायत दी।

सर्टिफिकेट बनवाने वाले को पकड़ा नहीं

यह पहला ऐसा केस है में जिसमें पुलिस ने संचालक अश्वनी कुमार को तो गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन संगरूर निवासी शिकायतकर्ता नितेष मोहन को नहीं पकड़ा। जबकि नितेष मोहन भी उतना ही भागीदार है। अगर उसका यह जाली सर्टिफिकेट ऑन लाइन शो करता तो वह आरोपी को पूरे पैसे दे देता और इस सर्टिफिकेट का नौकरी या किसी अन्य चीज में प्रयोग करता। इसलिए पुलिस को इस धोखाधड़ी की एफआईआर में शिकायतकर्ता को भी नामजद करना चाहिए।

मामले की जांच की जा रही है: एसएचओ

बच्चों से पैसे लेकर जाली सर्टिफिकेट तैयार कर सौंपने वाला यह गैंग है और इसमें कई ओर गिरफ्तारियां भी होनी हैं। पुलिस मामले की जांच में है और अन्य आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। -पवन कुमार, एसएचओ जीरकपुर पुलिस स्टेशन

क्राइम रिपोर्टर | जीरकपुर

पहले मोहाली और अब जीरकपुर में जाली सर्टिफिकेट बनाने का धंधा जोरों पर चल रहा था। मोहाली में मटौर पुलिस ने सैकड़ों की तादात में जाली सर्टिफिकेट्स सहित गिरोह को पकड़ा। जोकि पैरा मेडिकल के नाम पर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में अपना धंधा कई साल से चला रहे थे। पंजाब की स्पेशल स्टेट ऑप्रेशन सेल इंस्पेक्टर गुरचरण सिंह ने फेज-7 मार्केट में खुले पेरा मेडिकल इंस्टिट्यूट पर छापा मार गैंग को पकड़ा। अब मोहाली जिले में जीरकपुर शहर में यह गैंग सक्रिय है और जीरकपुर पुलिस ने रविवार को लोहगढ़ स्थित डीएबी इंस्टिट्यूट संचालक अश्वनी कुमार को पकड़ा है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है। जीरकपुर पुलिस को संगरूर के रहने वाले युवक नितेश मोहन ने शिकायत दी थी। उसने पुलिस को बताया कि पता चला कि जीरकपुर में लोहगढ़ रोड पर एक डीएबी के नाम इंस्टिट्यूट खुला है। वहां पर पैसे लेकर 10वीें व 12वीं का सर्टिफिकेट मिल जाता है। पीड़ित गत दिनों संचालक प्रीत कॉलोनी जीरकपुर निवासी अश्वनी कुमार ने मिला। अश्वनी ने दिल्ली के आईएससीई बोर्ड से 12वीं का सर्टिफिकेट तैयार करने की बात की और इसके लिए डेढ़ लाख रुपए मांगे। यही नहीं यह सर्टिफिकेट ऑन लाइन भी शो होना था। इसलिए पीड़ित ने उसको 80 हजार रुपए में रुप में पहली किश्त दे दी और अगली किश्त 70 हजार सर्टिफिकेट ऑन लाइन शो होने पर देने का वायदा किया। आरोपी ने पीड़ित को सर्टिफिकेट की एक कॉपी तैयार कर दे दी लेकिन ऑन लाइन यह सर्टिफिकेट शो नहीं हुआ। जिस पर पीड़ित ने जीरकपुर पुलिस में शिकायत दी।

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