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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. लॉ कमीशन (विधि आयोग) ने सरकार से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत लाने की सिफारिश की है। लॉ कमीशन का कहना है कि जब देश के अन्य खेल संघ आरटीआई के दायरे में आते हैं तो फिर बीसीसीआई को इससे बाहर रखने का कोई औचित्य नहीं है। इस संबंध में लॉ कमीशन ने बुधवार को विधि मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी। बता दें कि बीसीसीआई देश में क्रिकेट की शासकीय संस्था है।
दूसरे राष्ट्रीय खेल दायरे में आते हैं, बीसीसीआई क्यों नहीं?
- रिपोर्ट के मुताबिक, लॉ कमीशन ने मंत्रालय से कहा- बीसीसीआई सरकार की तरह ताकतों का इस्तेमाल करती है। इससे हिस्सेदारों के हित प्रभावित होते हैं, जिन्हें कि संविधान के पार्ट-3 के तहत दिया जाना निश्चित किया गया है। बीसीसीआई एक सार्वजनिक संस्था है। जब दूसरे सभी खेलों के नेशनल फेडरेशन आरटीआई के दायरे में रखे गए हैं तो फिर बीसीसीआई क्यों नहीं?"
- लॉ कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीसीसीआई को संविधनान के अनुच्छेद 12 के तहत निजी के बजाय सार्वजनिक संस्था के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। ताकि उसे सुप्रीम कोर्ट जैसे प्राधिकरणों के प्रति जवाबदेह बनाया जा सके। साथ ही उसके किसी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत में अपील की जा सके।
बीसीसीआई टैक्स में छूट लेकर लेती है वित्तीय लाभ : रिपोर्ट
- रिपोर्ट में कहा गया है कि बीसीसीआई टैक्स में छूट के रूप में सरकार से बहुत ज्यादा वित्तीय लाभ हासिल करती है। क्रिकेट स्टेडियम या खेल संबंधित अन्य कार्यों के लिए उसे बहुत कम कीमत पर जमीन दी जाती है। ऐसे में उसे जवाबदेह भी बनाया जाना चाहिए।
- रिपोर्ट के अनुसार, 1997-2007 के दौरान बपीसीसीआई को 21 अरब 68 करोड़ 32 लाख 37 हजार 489 रुपये की टैक्स में छूट मिली।
- रिपोर्ट में बीसीसीआई और उससे जुड़े सभी संगठनों को आरटीआई के तहत लाने की बात कही गई है। हालांकि उसने यह शर्त भी जोड़ी है कि वे सभी संगठन बीसीसीआई के बनाए नियमों को पालन करते हों।
- पिछले साल केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भी यह स्पष्ट किया था कि बीसीसीआई एक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन है। हालांकि तब उसने आरटीआई कानून के तहत इसे सार्वजनिक संस्था घोषित नहीं किया था।
नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन नहीं तो क्रिकेटरों को अर्जुन अवार्ड देने की सिफारिश क्यों?
- लॉ कमीशन ने रिपोर्ट में कहा है कि यदि बीसीसीआई एक ओर अपने क्रिकेटरों को अर्जुन अवार्ड के लिए नॉमिनेट करती है, वहीं दूसरी ओर खुद को एक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन न होने की दलील देती है। यद्यपि संसद और राज्य विधानमंडलों ने क्रिकेट के खेल को नियंत्रित करने के लिए उसे नहीं चुना है।
- रिपोर्ट में लॉ कमीशन ने उदाहरण दिया है कि भारतीय टीम राष्ट्र ध्वज छपे हुई किट पहनती है। उसके खिलाड़ियों के हेलमेट पर अशोक चक्र बना रहता है।
- लॉ कमीशन का मानना है कि बीसीसीआई वास्तव में एक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन ही है।
सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कमीशन को दिया था आदेश
- जुलाई 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कमीशन से कहा था कि वह यह बताए कि क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के तहत लाया जा सकता है कि नहीं?
- लॉ कमीशन ने विधि मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बीसीसीआई को संविधनान के अनुच्छेद 12 के तहत निजी के बजाय सार्वजनिक संस्था के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
आरटीआई के दायरे में आने का क्या असर होगा?
- अगर सरकार कमीशन के सुझाव को मान लेती है और बीसीसीआई को सार्वजनिक संस्था या आरटीआई के दायरे में आने वाली संस्था मान लेती है तो फिर राज्य, जोन या नेशनल टीम में खिलाड़ियों के चयन को लेकर कोई भी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। हालांकि सरकार लॉ कमीशन के सिफारिश को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
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