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दार्जिलिंग की नाबालिग से बाल मजदूरी कराने के बाद बस स्टैंड में छोड़ा

एक वर्ष पहले
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दार्जिलिंग की एक नाबालिग से रांची के एक दंपती द्वारा 4 महीने से जबरदस्ती चाइल्ड लेबर का काम कराए जाने का मामला सामने आया है। 12 साल की नाबालिग जब खूब जिद करने लगी तो उसे आईटीआई बस स्टैंड के समीप लाकर उक्त दंपती ने छोड़ दिया। पंडरा ओपी को गुरूवार को यह नाबालिग भटकते हुए मिली। इसके बाद पुलिस ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को इसकी सूचना दी।

सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर नाबालिग को प्रेमाश्रय में शेल्टर दिया गया। शुक्रवार को यह नाबालिग सीडब्ल्यूसी के सामने प्रस्तुत हुई। प्रथम काउंसिलिंग में लड़की ने बताया कि उससे जबरदस्ती काम कराया जा रहा था। चार महीना काम करने के बाद एक रुपए भी नहीं दिया गया। खाना भी भरपेट नहीं मिलता और घर जाने की मांग करने पर मारा जाता था। हालांकि, नाबालिग उक्त दंपती के घर का एड्रेस अभी बताने में असमर्थता जताई। जानकारी के अनुसार नाबालिग के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है। दूसरी ओर सीडब्ल्यूसी ने पंडरा ओपी को नाबालिग का बयान लेकर आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।

पढ़ाई के नाम पर रांची लेकर अाया था फूफा

नाबालिग के माता-पिता दार्जिलिंग के चाय बागान में काम करते हैं। पांचवीं कक्षा की पढ़ाई करने वाली नाबालिग को लातेहार जिले के महुआटांड़ में रहने वाले फूफा पढ़ाई के नाम पर अपने साथ लाया था। बाद में उक्त नाबालिग को रांची के एक दंपती के यहां काम पर रखवा दिया। सीडब्ल्यूसी के अनुसार अभी नाबालिग की काउंसिलिंग जारी है। अगर उसे बंधक बनाकर काम कराए जाने का मामला सामने आता है तो बैंडेड लेबर का मामला भी उक्त दंपती पर चलेगा।

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