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खांसी, खुशी, दुश्मनी, प्रेम और नशा ये 7 बातें लाख कोशिशों के बाद भी छिप नहीं सकती हैं, पूरी दुनिया को मालूम हो ही जाती हैं

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 05:24 PM IST

रहीम के 5 दोहे, जिन्हें अपना लेंगे तो आपके सभी दुख हो सकते हैं दूर

प्रसिद्ध कवि रहीम को उनके ज्ञा प्रसिद्ध कवि रहीम को उनके ज्ञा
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रिलिजन डेस्क. प्रसिद्ध कवि रहीम को उनके ज्ञानवर्धक दोहों के लिए जाना जाता है। उनका जन्म मुगल काल में बैरम खां के घर लाहौर में हुआ था। बैरम खां की मौत के बाद रहीम का पालन-पोषण बादशाह अकबर ने किया था। यहां जानिए रहीम के कुछ खास दोहे, इन दोहों में छिपे सूत्रों का पालन दैनिक जीवन पर हमारे सभी दुख दूर हो सकते हैं।

दोहा
खैर, खून, खांसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥
अर्थ : सेहत, कत्ल, खांसी, खुशी, दुश्मनी, प्रेम और नशा, ये सात बातें लाख कोशिशों के बाद भी छिप नहीं सकती हैं, पूरी दुनिया को मालूम हो ही जाती हैं।

दोहा
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
अर्थ : कोई भी पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाता है और कोई सरोवर अपना पानी खुद नहीं पीता है। इसी प्रकार अच्छा इंसान वही है जो दूसरों की भलाई के लिए काम करते हैं।

दोहा
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥
अर्थ : दुख में तो भगवान को याद करते हैं, लेकिन सुख में कोई इन्हें याद नहीं करता। अगर सुख में भी भगवान को याद करेंगे तो जीवन में दुख नहीं आएगा।

दोहा
जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो लगे, बढ़े अंधेरो होय॥
अर्थ : दीपक के चरित्र जैसा ही कुपुत्र का भी चरित्र होता है। दोनों ही पहले तो उजाला करते हैं, लेकिन पर जैसे-जैसे समय गुजरता है, अंधेरा होता जाता है।

दोहा
बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥
अर्थ : जब बात बिगड़ जाती है तो लाख कोशिश करने पर भी सुधरती नहीं है। जैसे कि फटे दूध को मथने से मक्खन नहीं निकलता है।

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