पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंइंदौर. नगर निगम के सात साल पुराने ट्रैफिक घोटाले में लोकायुक्त पुलिस ने निगम से मूल दस्तावेज मांगे हैं। लोकायुक्त पुलिस ने चार महीने पहले निगम के दो कार्यपालन यंत्रियों और करोड़ों का भुगतान लेने वाली दो फर्मों के मालिक पति-पत्नी के खिलाफ पद के दुरुपयोग व षड़यंत्र रचने के मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
टेंडर दो करोड़ का, भुगतान साढ़े छह करोड़
लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी ने निगम को पत्र लिखकर कहा है कि यातायात संबंधी खरीदे गए सामान की रसीद आदि व अन्य दस्तावेज की मूल प्रतियां दी जाएं। गौरतलब है कि आरोपियों ने यातायात के लिए लगने वाली सामग्री होते हुए भी उनकी खरीदी के टेंडर निकाले थे। बाद में जो सामग्री जहां लगाना बताई, वह वहां लगाई ही नहीं गई थी। टेंडर दो करोड़ रुपए का था, किंतु लगभग साढ़े छह करोड़ का भुगतान करना पड़ा।
जांच के बाद सामने आएंगे और आरोपियों के नाम
लोकायुक्त पुलिस ने जनवरी में निगम के तत्कालीन सिटी इंजीनियर यातायात व वर्तमान में कार्यपालन यंत्री अशोक राठौर और दिलीपसिंह चौहान, ठेकेदार व रजत सेल्स काॅर्पोरेशन के मालिक राजेश जैन निवासी लोधीपुरा, उनकी पत्नी और रोचक इंडस्ट्रीज सेल्स काॅर्पोरेशन लोधीपुरा की मालिक प्रिया जैन, निगम के ऑडिटर (जिसका नाम अभी स्पष्ट नहीं हुआ है) के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच में और भी आरोपियों के नाम सामने आएंगे, जिन्हें बाद में एफआईआर में शामिल किया जाएगा। मामला वर्ष 2010-2011 और वर्ष 2011-2012 का है। निगम की ट्रैफिक विंग ने राजेश जैन और प्रिया जैन को शहर में मार्ग संकेतक, स्पीड बाॅम, रोड स्टट, व्हाइट पट्टे लगाने आदि कार्य के लिए टेंडर मंजूर किया था।
शिकायत पर प्रारंभिक जांच में पता चला कि भ्रष्टाचार करने की नियत से एकमत होकर षड़यंत्र रचा, जिसके परिणाम स्वरूप जो सामग्री निगम के स्टोर में मौजूद थी, उसका भी टेंडर निकाल दिया गया। जो सामग्री जहां बताई गई, वह वहां नहीं पाई गई। कई ऐसी सामग्री जो पहले से लगी हुई थी, उन्हें भी टेंडर में शामिल किया गया और उसे भी लगाना बता दिया गया। जांच में पाया गया कि संबंधित फर्मों के मालिकों से सांठगांठ के चलते निगम के उक्त दोनों आरोपी इंजीनियरों और अन्य संबंधितों ने पद का दुरुपयोग करते हुए भुगतान की स्वीकृतियां जारी कर दी थीं।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.