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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में मरीजों की लंबी कतारें, संक्रमण फैलने का खतरा

एक वर्ष पहले
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डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में कहीं भारी भीड़ के कारण लंबी कतारों में तो कहीं सीढ़ियों में बैठ कर मरीजों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अब हालात तो यह हैं कि मरीजों का मर्ज ऐसी स्थिती में कम नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था भी इसको लेकर नहीं बन पा रही। बेशक स्वास्थ्य विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी कर भारी भीड़ में न जाने की सलाह लोगों को तो दी जा रही है, लेकिन जहां अस्पतालों में मरीजों को बीमारी के उपचार के लिए पहुंचना पड़ता है, वहां भी यह लंबी कतारें कहीं न कहीं सवाल तो उठा ही रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की मानें तो मरीजों की कई बार बीमारी के चलते ह्यूमैनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है। जिस कारण कई बार दूसरी बीमारियां में उनमें आसानी से प्रवेश कर जाती हैं। यह बीमारियां वहां मौजूद दूसरे मरीजों से संक्रमण फैलने से हो सकती है।

ऐसे में यहां इस भीड़ के कारण वह भी काफी लंबे समय तक इंतजार में एक दूसरे के साथ होने से कई बार मरीजों की तीमारदार जो इन कतारों में खड़े रहते हैं बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। वह कितने सेफ हैं इसको लेकर जरूर लोगों की नजरें कॉलेज या अस्पताल प्रशासन की ओर लगी हैं कि इन कतारों से बचने के लिए कोई ठोस उपाय किए जा सकें।

तीमारदारों और मरीजों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में लैब से लेकर ओपीडी तक प्रॉपर बारी के इंतजार के लिए बैठने का प्रॉपर स्थान ही नहीं है। रणजीत सिंह, विजय कश्यप, वीरेंद्र शर्मा, कल्पना देवी, राजेश्वरी देवी, कश्मीरो देवी, कंचन कुमार, राजेश, राजेंद्र सिंह, विवेक कुमार, ज्ञान चंद व प्रकाश चंद सहित कई लोगों का कहना है कि ओपीडी और लैब सुविधा खुले स्पेस में तय कि जानी चाहिए ताकि वह अपनी बारी के इंतजार के लिए वहां बैठ सकें।

उनका कहना है कि वैसे डॉक्टर्स ही ज्यादा भीड़ में एक दूसरे से दूरी बनाए रखने को एडवाइज करते हैं, लेकिन यहां एक दूसरे मरीजों या तीमारदारों को बारी के लिए लंबी कतारों में एक दूसरे से भारी भीड़ के कारण जुड़ कर खड़े होने पर विवश होना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने कॉलेज प्रशासन से शीघ्र ही इस दिशा में उचित कदम उठाने की भी मांग की है क्योंकि उनका कहना है कि अस्पतालों मेंं हर बीमारी का मरीज उपचार को पहुंचता है। जिनसे एक दूसरे में सक्रंमण फैलने की भी ऐसी व्यवस्था से भय बना रहता है।

यहां रहती ज्यादा भीड़...यहां पर्ची काउंटर, एक्सरे रूम, अल्ट्रासाउंड, ओपीडी, लैब सहित कई स्थानों पर ज्यादा भीड़ रहती है। इनमें कई मरीज तो कई उनके तीमारदार बारी के इंतजार में कतारों में लगे होते हैं। यहां समस्या सबसे बड़ी यह है कि लैब में तो बैठने के लिए कोई ज्यादा स्पेस ही नहीं है इसी कारण यहां मरीज तो सीढ़ियों पर भी बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं। इसके अलावा बेहद छोटे से स्थान पर चल रही आर्थाे ओपीडी के बाहर तो हमेशा मरीज एक दूसरे के बेहद नजदीक खड़े रहते हैं। जाहिर है मरीजों में इससे दूसरी बीमारियों के फैलने का कहीं न कहीं भय बना रहता है। हैरानी की बात तो यह है कि यहां नया भवन बनाने की योजना थी, लेकिन वह तो नहीं बन पाया जिससे यहां मरीजों के लगातार बढ़ रहे आंकड़ों से अब स्पेस की बेहद कमी खलनी लगी है। इस कॉलेज में जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है, ऐसा यहां मरीजों के बैठने के सिस्टम से देखा जा सकता है।


मरीजों में ह्यूमैनिटी सिस्टम हो सकता है कमजोर

स्पेस की कमी के कारण समस्या है। नया भवन बनने पर ही यह समस्या हल हो सकती है। मरीजों को कुछ स्थानों पर बैठने के लिए बेंच लगाए गए हैं। रंग रोगन का कार्य भी चल रहा था। फिर भी मरीजों को किसी तरह की समस्या न हो ओर समय पर ओपीडी सुविधा मिले टोकन नंबर सुविधा भी है।
डॉ. अनिल वर्मा, एमएस, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर

मेडिकल कॉलेज लैब में कतारों में खड़े मरीज
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