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परशुराम जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा, शहर में हो रहे हैं अनेक आयोजन

3 वर्ष पहले
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इंदौर। भगवान परशुराम प्रकटोत्सव के अवसर पर बुधवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई इसके साथ ही शहर में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर भगवान परशुराम की जन्म स्थली जानापावा में भी हजारों भक्ताें द्वारा भगवान परशुराम प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। बुधवार को राजेन्द्रनगर से निकली शोभायात्रा में हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल थे। पंडित संजय मिश्रा ने बताया कि यात्रा प्रगति नगर साईं मंदिर से होते हुए परशुराम चौक पर समाप्त हुई। शोभायात्रा में भगवान परशुराम की झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। इसके साथ ही यात्रा में लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शनक किया जा रहा था। शोभायात्रा के दौरान 21 कार्यकर्ताओं की टीम ने स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा। 


- बुधवाार शाम 6 बजे बड़ा गणपति से राजबाड़ा तक सर्वब्राह्मण समाज आरक्षण सुधार की मांग को लेकर शोभायात्रा निकालेगा। यात्रा में समाज आरक्षण सुधार की झांकी शामिल करने वाला था। हालांकि समाज के ही एक धड़े की नाराजगी के बाद इसे निरस्त कर दिया। अब एक वाहन में होर्डिंग लगाएंगे, जिसमें आरक्षण सुधार की मांग की जाएगी। 


राजबाड़ा पर होगी महाआरती
समाज द्वारा निकाली जाने वाली शोभायात्रा का नेतृत्व इस बार 500 महिलाएं करेंगी। यात्रा का मुख्‍य आकर्षण भगवान परशुरामजी का भव्य रथ होगा। यात्रा का समापन राजबाड़ा पर होगा। इस दिन को हम ब्राह्मण एकता और स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाएंगे। समापन पर महाआरती होगी। 

 

- अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज द्वारा बुधवार सुबह रणजीत हनुमान मंदिर से प्रभातफेरी निकाली गई। संयोजक जया तिवारी ने बताया कि प्रभातफेरी का समापन अन्नपूर्णा मंदिर पर हुआ।

- ब्राह्मण सोशल ग्रुप द्वारा स्नेहलतागंज स्थित परशुराम मंदिर पर सुबह भगवान का गन्ने के रस से अभिषेक किया गया। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार और महाआरती भी की गई।

 

इंदौर के पास स्थित है भगवान परशुराम की जन्म स्थली जानापावा
जानापाव जैसा नाम वैसा ही मार्ग। पहाड़ी पर बना मंदिर, ऊबड़-खाबड़ रास्ते, नाले, घनी झाडियां और जंगली जानवरों का डर, यह सब पार करने के बाद पहुंचते हैं जानापाव। जानापाव पहुंचते ही आप इन सारी समस्याओं को भूल जाते थे, क्योंकि यहां आपके सामने होता है शानदार नजारा और भगवान परशुराम की जन्म स्थली से जुड़े राज। इंदौर से करीब 28 किमी दूर जानापाव भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। जानें, भगवान परशुराम की जन्म स्थली और उसने जुड़ी कथा...

  • महर्षि जमदग्रि की तपोभूमि तथा भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव, इंदौर की महू तहसील के हासलपुर गांव में स्थित है।
  • मान्यता है कि जानापाव में जन्म के बाद भगवान परशुराम शिक्षा ग्रहण करने कैलाश पर्वत चले गए थे। 
  • जहां भगवान शंकर ने उन्हें शस्त्र-शास्त्र का ज्ञान दिया था।
  • जानपाव पहुंचने के दो रास्ते हैं। एक रास्ता पहाड़ाें के बीच से होकर जाता है, जबकि दूसरा पक्का मार्ग है। 


कुंड से निकलती है ये नदियां

  • जानापाव पहाड़ी से साढ़े सात नदियां निकली हैं। इनमें कुछ यमुना व कुछ नर्मदा में मिलती हैं। 
  • यहां से चंबल, गंभीर, अंगरेड़ व सुमरिया नदियां व साढ़े तीन नदियां बिरम, चोरल, कारम व नेकेड़ेश्वरी निकलती हैं। 
  • ये नदियां करीब 740 किमी बहकर अंत में यमुनाजी में तथा साढ़े तीन नदिया नर्मदा में समाती हैं।

 

भगवान परशुराम के जन्म के संबंध में प्रचलित कथाएं
- भगवान परशुराम के पिता भृगुवंशी ऋषि जमदग्रि और माता राजा प्रसेनजीत की पुत्री रेणुका थीं। ऋषि जमदग्रि बहुत तपस्वी और ओजस्वी थे। ऋषि जमदग्रि और रेणुका के पांच पुत्र रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्ववानस और परशुराम हुए। एक बार रेणुका स्नान के लिए नदी किनारे गईं। संयोग से वहीं पर राजा चित्ररथ भी स्नान करने आया था। राजा को देख रेणुका उसपर मोहित हो गईं। ऋषि ने योगबल से पत्नी के इस आचरण को जान लिया। उन्होंने अपने पुत्रों को मां का सिर काटने का आदेश दिया। किंतु परशुराम के अलावा सभी ने ऐसा करने से मना कर दिया। परशुराम ने पिता के आदेश पर मां का सिर काट दिया। क्रोधित पिता ने आज्ञा का पालन न करने पर अन्य पुत्रों को चेतना शून्य होने का श्राप दिया, जबकि परशुराम को वर मांगने को कहा। तब परशुराम ने तीन वरदान मांगे...

  1.  माता को फिर से जीवन देने और माता को मृत्यु की पूरी घटना याद न रहने का वर मांगा।
  2. अपने चारों चेतना शून्य भाइयों की चेतना फिर से लौटाने का वरदान मांगा।
  3. तीसरा वरदान स्वयं के लिए मांगा, जिसके अनुसार उनकी किसी भी शत्रु से या युद्ध में पराजय न हो और उनको लंबी आयु प्राप्त हो।
  4. पिता जमदग्रि अपने पुत्र परशुराम के ऐसे वरदानों को सुनकर गदगद हो गए और उनकी कामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।
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