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28 जुलाई से शुरू हो रहा है सावन, शिवजी की कृपा पाने और वास्तुदोष दूर करने के लिए घर के आसपास लगाएं बिल्वपत्र का पौधा

घर के उत्तर-पश्चिम की तरफ लगा बिल्व का पौधा दिलाता है सम्मान और धन

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 01:37 PM IST
Lord shiv and bilwa patra in savan maas 2018
रिलिजन डेस्क. भगवान शिव की भक्ति का महीना सावन 28 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन में आपके घर में शिव की कृपा रहे और घर में सुख-शांति आए इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। अगर घर के आसपास कोई खाली जगह हो तो वहां बिल्वपत्र का पौधा लगाया जा सकता है। बिल्वपत्र सिर्फ भगवान शिव को ही प्रिय नहीं हैं, इनमें जबरदस्त आयुर्वेदिक औषधि के गुण भी होते हैं, जो कई बीमारियों को दूर करते हैं। इसे बेल का पेड़ भी कहा जाता है। इनमें डायबिटीज, बीपी जैसी कई गंभीर बीमारियों को दूर करने के गुण होते हैं। वास्तु के हिसाब से भी बेल का पेड़ घर के बाहर या आसपास शुभ माना गया है।
बिल्व वृक्ष को शास्त्रों में बहुत ही खास बताया गया है। शिवपुराण में इस पेड़ का बहुत महत्व बताया गया है। भगवान शिव के साथ-साथ सभी देवी-देवताओं को बिल्व वृक्ष बहुत ही प्रिय होता है। जिस भी घर में या फिर घर के आस-पास ये पेड़ मौजूद होता है, वहां पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा बनी रहती है।
शिवपुराण के अनुसार बिल्वपत्र से जुड़ी खास बातें
1. जिस घर मे बिल्व वृक्ष लगाया जाता है और रोज उसे पानी दिया जाता है, वहां के लोगों को जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है, साथ ही साथ उस जगह पर पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है।
2. बिल्व के पौधे को घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना सबसे शुभ होता है। यहां लगाया गया बेल का वृक्ष घर के लोगों के मान-सम्मान में वृद्धि करता है।
3. अगर उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना संभव न हो तो इसे घर की उत्तर या दक्षिण दिशा में भी लगाया जा सकता है।
4. शिवलिंग पर चढ़ाया गया शिवलिंग बासी नहीं होता यानि कि 1 ही बिल्व पत्र को धोकर अगले दिन फिर से पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।
5. अष्टमी, चतुदर्शी, अमावस्या और रविवार को बिल्व पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता।
बिल्व वृक्ष का महत्व
- शिवपुराण में बिल्व वृक्ष को शिवजी का ही रूप बताया गया है। इसे श्रीवृक्ष भी कहते हैं।
- श्री देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस कारण बिल्व की पूजा से लक्ष्मीजी की कृपा भी मिलती है।
स्कंदपुराण में मिलता है जिक्र
- स्कंदपुराण के अनुसार एक बार देवी पार्वती ने अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बिल्व वृक्ष उत्पन्न हुआ।
- इस वृक्ष की जड़ों में गिरिजा, तना में महेश्वरी, शाखाओं में दक्षायनी, पत्तियों में पार्वती, फूलों में गौरी और फलों में देवी कात्यायनी वास करतीं हैं।

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Lord shiv and bilwa patra in savan maas 2018
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