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डाउनलोड करेंभोपाल. नगर निगम ने छोटे तालाब किनारे नीलम पार्क में प्रदेश के पहले म्यूजिकल फाउंटेन और लेजर शो को बनाकर वाहवाही तो लूट ली, लेकिन इसका ठीक से संचालन नहीं कर पाया। एक करोड़ 80 लाख रुपए खर्च कर बनाए गए इस कैंपस के गेट पर पिछले दो साल से ताला लटक रहा है। नगर निगम के अफसर म्यूजिकल फाउंटेन और लेजर शो बंद करने के पीछे तर्क यह दे रहे हैं कि इसका मेंटेनेंस महंगा पड़ रहा है। लेजर शो देखने के लिए एक बार में यहां 540 दर्शक बैठ सकते हैं।
शुरुआत में यहां दर्शकों की संख्या 200 से भी ऊपर रही, लेकिन बाद में संख्या घटकर 20 तक सिमट गई। इससे निगम की आय भी कम हुई और मेंटेनेंस महंगा हो गया। इसके चलते दो साल से यह बंद है और उपकरण धूल खा रहे हैं।
यह भी रहीं कमियां: लोगों के बीच इस फाउंटेन के बारे में निगम प्रशासन ठीक से प्रचार-प्रसार नहीं कर पाया। नगर निगम को सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट आदि स्थानों पर इस सुविधा के होर्डिंग्स व बैनर लगाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
करार था तीन साल के मेंटेनेंस का, लेकिन उतना भी नहीं चला
लेजर इवेंट्स प्रा.लि. बेंगलुरू की कंपनी ने इसे लगाया था। मेंटेनेंस के लिए कंपनी से तीन साल का करार था, लेकिन तब भी ज्यादातर समय यह बंद ही रहा। इसके पार्ट निगम को बेंगलुरू से मंगाने पड़ते थे जो काफी महंगे होते हैं। निगम अफसरों के अनुसार छोटे पार्ट खरीदने के लिए छह से आठ लाख रुपए लगते हैं। आय नहीं होने के कारण निगम पर आर्थिक रूप से पड़ रहे भार को देखते हुए निगम प्रशासन ने मेंटेनेंस की ओर भी ध्यान नहीं दिया।
जिम्मेदारों के तर्क : लेजर शो घाटे में चल रहा था, इसलिए उसे बंद कर दिया गया है
झील संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रभारी संतोष गुप्ता ने बताया कि म्यूजिकल फाउंटेन और लेजर शो घाटे में चल रहा था। इसलिए बंद है। परिसर में लगे फाउंटेन ठीक हैं, लेकिन लेजर खराब है।
नगर निगम के एमआईसी प्लानिंग एवं सूचना प्रौद्योगिकी दिनेश यादव ने बताया कि लगातार दर्शकों की संख्या कम होने से आमदनी नहीं हुई। इसके मेंटेनेंस और संचालन का जिम्मा निगम के पास है।
पूर्व मेयर कृष्णा गौर ने बताया कि यह पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए शुरू किया गया ड्रीम प्रोजेक्ट था। मेरे कार्यकाल के बाद निगम ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए यह बंद हो गया।
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