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महाभारत 2019: मध्यप्रदेश में किसान, कारोबारी, कर्मचारी भाजपा से नाराज; कांग्रेस दे रही है इस आग को हवा

किसानों की दुखती रग देखकर ही किसान आंदोलन की पहली बरसी पर कांग्रेस ने चुनावी बिगुल मंदसौर में बजाया।

Dainik Bhaskar

Jun 22, 2018, 01:52 AM IST
भाजपा के पास बूथ स्तर तक मजबूत भाजपा के पास बूथ स्तर तक मजबूत

- 2019 के महाभारत के लिए नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव सेमी फाइनल

- 2014 लोकसभा चुनाव में 29 सीटों में से 27 पर भाजपा को जीत मिली

भोपाल. मंदसौर के बड़वन गांव के किसान दुर्गालाल धाकड़ ने जून 2017 के किसान आंदाेलन की हिंसा के दौरान अपना इकलौता बेटा खोया। तब पांच किसान पुलिस की गोली से मारे गए, मगर उनके बेटे घनश्याम की मौत पुलिस की गिरफ्त में पिटाई से हुई। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उनकी बहू को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपए की मदद दी, लेकिन धाकड़ का कहना है कि उन्हें पैसा नहीं इंसाफ चाहिए। दोषी पुलिस अफसर अब तक बचे हुए हैं। प्रदेशभर में किसान आर्थिक बदहाली में हैं।

किसानों की दुखती रग अौर कांग्रेस का वादा

मुख्यमंत्री ने 10 साल पहले खेती को फायदे का कारोबार बनाने का नारा दिया था, लेकिन पिछले कुछ सालों में हमने कीमतों की भारी गिरावट के चलते किसानों को अपनी उपज सड़कों पर बर्बाद करते हुए भी देखा। खुदकुशी की खबरें हैं। भावांतर जैसी योजनाओं ने तात्कालिक राहत जरूर दी मगर कोई बड़ा फायदा किसानों को नहीं हुआ। किसानों की दुखती रग देखकर ही किसान आंदोलन की पहली बरसी पर कांग्रेस ने चुनावी बिगुल मंदसौर में बजाया। राहुल गांधी यहां आए और वादा कर डाला- प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी तो सिर्फ 10 दिन में किसानों का कर्ज माफ। यह रकम करीब 20 हजार करोड़ है। कांग्रेस नेता नरेंद्र नाहटा कहते हैं- हमारे लिए तो अस्तित्व की लड़ाई है। हमारे नेता ने यह वादा किया है तो जरूर कोई तरीका निकालेंगे।

महाभारत 2019 के मद्देनजर सियासी समीकरण
2019 के महाभारत के लिए नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव सेमी फाइनल है। कांग्रेस विपक्ष के रूप में 15 साल से निष्प्राण है। भाजपा के पास बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क है। लोकसभा की 29 सीटों में से पिछली बार भाजपा 27 पर जीती। सिर्फ कमलनाथ और सिंधिया जीत पाए थे। अब कांग्रेस को बचाने का जिम्मा इसी जोड़ी के कंधों पर है। इधर भाजपा के कई सांसद अपनी खिसकती जमीन से वाकिफ हैं। करीब 12 सांसद विधानसभा चुनाव में उतरने का मन बना चुके हैं। इन सीटों पर भाजपा नए चेहरे लाएगी। पार्टी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि हम एक साथ सेमी फाइनल और फाइनल की तैयारी में जुटे हैं। अभी से लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति बन चुकी है। हम 65 हजार बूथों पर फोकस कर रहे हैं। प्रमुख रूप से दो दलीय मुकाबले में बसपा का वोट बैंक चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड में है, वह भी सिर्फ 15 फीसदी। पिछले विधानसभा चुनाव में 15 सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर थी। लोकसभा की चार-पांच सीटों पर बसपा प्रभावी है। कांग्रेस-बसपा मिलकर लड़े तो भाजपा को मुश्किल हो सकती है। हालांकि हाल ही में बसपा कह चुकी है कि वह अकेले ही चुनाव लड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषक गिरिजाशंकर मानते हैं कि बसपा कभी प्री पोल अलायंस नहीं करती। यह भाजपा के लिए फायदे की बात है।

भाजपा के दिग्गजों के चुनाव क्षेत्रों में हाल-बेहाल
यह सही है कि बिजली, सड़क और पानी (बीएसपी) में 15 वर्षों में शिवराज सरकार ने सुधार कर दिखाया है। 10 साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजयसिंह को 2003 में भाजपा के रणनीतिकार अनिल माधव दवे ने मिस्टर बंटाढार का चर्चित तमगा इन्हीं तीन मुद्दों पर दिया था। हाल ही में नीति आयोग की रिपोर्ट में शामिल 8 सर्वाधिक पिछड़े जिलों ने सबका साथ, सबका विकास की पोल खोली। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें विदिशा भी शामिल है, जहां से सुषमा स्वराज सांसद हैं। शिवराजसिंह सांसद रहे हैं। उनकी खेतीबाड़ी वहां है। यह अटल बिहारी वाजपेयी की सीट भी रही है। यहां पलीता गांव के वेदप्रकाश उपाध्याय की टिप्पणी है, बिजली, सड़क और पानी जैसी उपलब्धियां तो भाजपा सरकार के पहले पांच साल का ही प्रश्नपत्र हैं। इस आधार पर भाजपा 15 साल बाद अंकों की अपेक्षा नहीं कर सकती! नया क्या किया?

ये हैं राज्य में बड़े मुद्दे

किसानों की स्थायी नाराजगी। सरकार खेती को फायदे का धंधा बनाने के वायदे पर खरी नहीं उतरी। सिर्फ तात्कालिक कदम ही उठाए। व्यापमं महाघोटाले को कांग्रेस बड़ा मुद्दा मान रही है। सरकारी योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन लचर। अफसरशाही हावी।

अधिकारी-कर्मचारी वर्ग नाराज

अधिकारी-कर्मचारी-पेंशनरों को मिलाकर संख्या करीब 15 लाख है। तीन साल में 90 बड़े आंदोलन हुए हैं। प्रमोशन में आरक्षण का पक्ष लेते हुए एक सभा में मुख्यमंत्री का बयान था कि कोई माई का लाल इसे खत्म नहीं कर सकता। प्रतिक्रिया में सपाक्स के नाम से सामान्य पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संस्था बनी, जिसमें कई अफसर-कर्मचारी नेता खुलकर सामने आ गए। शायद मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहां ऐसे किसी संगठन ने सीधे चुनाव में उतरने की घोषणा की है। सरकार से नाखुश हर तबके की पीठ पर कांग्रेस हाथ रख रही है।


जटिल जीएसटी से व्यापारी दुखी
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी बताते हैं कि एक्सपोर्टर्स का रिफंड इतना लेट हुआ है कि वर्किंग कैपिटल का 70% तक बकाया है। पैसे की कमी ने एक्सपोर्ट घटा दिया। पिछले 11 सालों में 9 इन्वेस्टर्स मीट में 15 लाख करोड़ के एमओयू हुए। सरकारी दावा भी 10% निवेश का ही किया जा रहा है।


बेरोजगारी सबसे सुलगता सवाल
बुंदेलखंड में टीकमगढ़ जिले के लटेसरा गांव के बल्ली पाल कहते हैं, जब से भाजपा सत्ता में आई तब से रोजगार के लिए चेन्नई जा रहे हैं। सरकार ने बेहतर सड़कें जरूर बनवाईं। मगर इसलिए कि हम चैन से झांसी जाकर चेन्नई की ट्रेन पकड़ लें, यहां तो स्थायी रोजगार का इंतजाम है नहीं!

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