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महाभारत-2019 भास्कर दृष्टि: कर्नाटक में प्रचंड गति की महिमा, विजय के प्रकार व युद्ध का विस्तार

आज कर्नाटक में घटे भीमकाय मंचन ने यही पुन: सिद्ध किया। जीवन में जो कुछ भी हो सकता है, हमारे चुनावों में हो चुका है।

Dainik Bhaskar

May 20, 2018, 04:28 AM IST
कल्पेश याग्निक दैनिक भास्कर के समूह संपादक हैं। कल्पेश याग्निक दैनिक भास्कर के समूह संपादक हैं।

‘यन्नेहास्ति न कुत्रचित्’
अर्थात् जो विषय यहां (महाभारत में) नहीं है, वह कहीं नहीं है।


न कभी था। न है। न होगा।
हमारे भारत का महाभारत चुनाव ही हैं। आज कर्नाटक में घटे भीमकाय मंचन ने यही पुन: सिद्ध किया। जीवन में जो कुछ भी हो सकता है, हमारे चुनावों में हो चुका है।
इसी के साथ आने वाले आम चुनाव के लिए वर्षभर के संघर्ष की तैयारियां आरम्भ हो गईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, हालांकि तीखा कटाक्ष करते रहते हैं कि देश में प्रत्येक घटना अब 2019 के चुनाव से जोड़ दी जाती है। किन्तु विचित्र होकर भी यही सत्य है।
कर्नाटक में क्या हुआ?
किसी को जनादेश नहीं मिला। त्रिशंकु सदन देखते ही कांग्रेस ने पलक झपकते जनता दल सेकुलर को सरकार मानकर, अपना समर्थन दे दिया। दावा प्रस्तुत कर दिया। यह प्रचंड गति थी। जिन गोवा, मणिपुर, मेघालय की भारी चर्चा अब हो रही है; वहां कांग्रेस घोंघा गति से चल रही थी। वहां भाजपा अति सक्रिय रही। विजय न होकर भी, हो गई। कर्नाटक में भी भाजपा, येद्दियुरप्पा की सरकार बना लेती। यदि सुप्रीम कोर्ट ने समय 15 दिन को घटाकर इतना कम न किया होता। और गुप्त मतदान को मना न किया होता। पिछली बार यहीं भाजपा ढेर सारे विधायकों को रिझाकर सत्ता में आई थी। किन्तु इस बार समय पर कुछ न करने से भयावह मात खा गई।
तो संघर्ष पर्व का आरम्भ प्रचंड गति का महिमा गान है। पराजित हों तो रणनीति बनाओ। मतदाताओं ने नहीं चुना - तो न्यायालय में चुनौती दो। जोड़ो। तोड़ो। मोड़ो। लड़ो। अनैतिक हो सकता है। किन्तु नैतिकता की प्रार्थना उसी प्रांगण में उचित लगेगी जहां राजधर्म के सच्चे मानदण्ड स्थापित हों। जहां नागरिकों का हित ही राजा का हित माना जाता हो।
यहां तो कुछ भी तय ही नहीं है। सब जुआ है। द्यूतक्रीड़ा। कपट-द्यूत।
एक प्रश्न उठा कि कर्नाटक में विजयी कौन रहा? चूंकि सर्वाधिक बड़ी संख्या तो भाजपा के पास है। और सत्तारुढ़ होने जा रहे दोनों दलों में मतभेद ही नहीं, मनभेद हैं। तो क्या वे बने रहेंगे? जद-एस कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारों को समर्थन देकर गिरा चुकी है। बिहार में महागठबंधन था। आज कहां है? स्वयं नरेन्द्र मोदी के समक्ष चुनौती नं. 1 बने नीतीश कुमार अब उन्हीं के समर्थन व मित्र दलों वाली 20 सरकारों में से एक है। पूरी सरकार की सरकार भाजपा के पास स्वत: आ जाती है। या आ जाती ‘थी’। तो विजय के अनेक प्रकार हैं। गुजरात में हारकर भी कांग्रेस विजेता-गर्व लिए निखरी। उत्तरप्रदेश में जन्मजात शत्रु सपा-बसपा एक हुए। और अपराजेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके ही संसदीय क्षेत्र में पराजित कर दिया। और चर्चा छिड़ी कि उत्तरप्रदेश विधानसभा में हुई हार का प्रतिशोध पूरा हुआ! धृतराष्ट्र के प्रश्न पर ऋषियों ने उत्तर दिया था कि यदि शत्रु की तुलना में हमारी सेना छोटी है, तो उसे समेटकर, थोड़ी ही दूर रखकर युद्ध लड़ना चाहिए। केवल विशाल सेना वाले ही इच्छानुसार, फैलकर लड़ सकते हैं।
समूचे विपक्ष का तो अभी पता नहीं, किन्तु कांग्रेस ने संभवत: इसे लागू कर दिया है। अब वह मध्यप्रदेश, राजस्थान में उत्साह से जा सकेगी। छत्तीसगढ़ जैसे राजनीतिक रूप से अति जागरूक राज्य में शक्तिशाली हो उतरेगी।
किन्तु युद्ध का विस्तार, प्रलयंकारी होगा। क्योंकि नरेन्द्र मोदी किसी भी पराजय को स्वीकार नहीं करते। अमित शाह, इस तरह कर्नाटक हारकर, पुन: राहुल गांधी से ‘हत्या के आरोपी’ जैसे आपत्तिजनक संबोधन सहन नहीं करेंगे। सभी देखेंगे, मोदी किस तरह राजनीति में भयानक गर्जना या भयावह सन्नाटा पैदा करेंगे। उनके पास विकराल संख्या है। 2019 का स्पष्ट लक्ष्य है। और नेतृत्वहीन विपक्ष है।
किन्तु योद्धा चारों ओर, सभी के खेमे में हैं। महाभारत में है कि ‘शूरवीरों और नदियों की उत्पत्ति का ज्ञान किसी को नहीं होता।’
इसलिए कभी दक्षिण से, तो कभी उत्तर से कोई भी, कभी भी पताका फहरा सकता है। व्यूह-रचना ही विजेता का तिलक करेगी।
कल्पेश याग्निक। कल्पेश याग्निक।
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