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महाभारत 2019: राहुल गांधी मुद्दों की बारीकियां समझने के लिए विशेषज्ञों से ले रहे क्लास, 50 से ज्यादा सत्र हो चुके

विरोधी विचारों को जानने की भी कोशिश, निष्पक्ष राय के लिए बुलाए जा रहे एक्सपर्ट्स

Danik Bhaskar | Sep 07, 2018, 07:44 AM IST
राहुल देश के सामने मौजूद लाइला राहुल देश के सामने मौजूद लाइला

  • राहुल गांधी ने मुद्दों को समझने ब्लॉगरों, ट्विटर हैंडलरों को बुलाया
  • 12 तुगलक रोड स्थित बंगले पर 50 से ज्यादा सत्रों में हो चुका है 150 घंटे मंथन

नई दिल्ली. ‘अपनी बात रखने से पहले मैं आपको साफ बता दूं कि मैंने कांग्रेस को आज तक वोट नहीं दिया और मैं वाजपेयीजी का प्रशंसक रहा हूं।’ करीब 30 सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के जमावड़े में एक एक्सपर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने यह बात कही। मगर राहुल के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। वो मुस्कुराए और एक तरह से संदेश दे दिया कि आप अपनी बात बेबाक ढंग से रखिए।

दरअसल, यह एक ‘क्लास’ थी, जो राहुल के 12 तुगलक रोड स्थित बंगले पर लगी थी। इसमें उन ब्लॉगरों, ट्विटर हैंडलरों को बुलाया गया था, जिनकी कोई भी पोस्ट मिनटों में वायरल हो जाती है। कभी उन्हें लोकप्रियता मिलती है, तो कभी ट्रोल ब्रिगेड उनके पीछे पड़ जाती है। राहुल के नजदीकी सूत्रों ने भास्कर को बताया कि ‘मुद्दों को समझने’ और ‘बड़ी जिम्मेदारी’ (इशारा पीएम के पद की ओर) स्वीकार करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने एक्सपर्ट्स के साथ मंथन का यह सिलसिला शुरू किया है। ऐसे सत्र पिछले साल दिसंबर में उनके कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से ही शुरू हो गए थे। अब तक उनके लिए 50 से अधिक सत्र हो चुके हैं। इस तरह उनकी करीब 150 घंटे की मास्टर क्लास हो चुकी है।

इन अहम मुद्दों पर हो चुकी है क्लास : सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी देश के सामने मौजूद लाइलाज समस्याओं का स्थायी समाधान जानने पर भी फोकस कर रहे हैं। अकेले किसान संकट को लेकर ही उन्होंने नामी एग्री एक्सपर्ट्स से दस अलग-अलग सत्रों में बात की है। जॉब क्रिएशन पर भी पांच सत्र हो चुके हैं। दलितों, कमजोर वर्गों, महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं को रोकने पर भी एक मंथन हो चुका है।

मुद्दों को समझने के लिए सक्रिय दिख रहे राहुल : इसके अलावा समय-समय पर सामने आने वाले मुद्दों पर भी सेशन हो रहे हैं। मसलन, जब सुप्रीम कोर्ट के चार बड़े जज प्रेस के सामने आए थे, उस दिन भी कांग्रेस अध्यक्ष ने फौरन अपनी पार्टी के विशेषज्ञ वकीलों की राय ली। कई पूर्व न्यायाधीशों के साथ भी गहन विचार-विमर्श किया। कुछ सेशन गवर्नेंस और इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क पर भी हुए हैं। इनमें राहुल ने पूर्व नौकरशाहों के साथ शासन की बारीकियों को समझा। वे विदेश नीति और डोकलाम मुद्दे पर पूर्व राजनयिकों और थिंकटैंक संस्थाअों से जुड़े लोगों के सत्र भी कर चुके हैं।

राफेल डील की बारीकी भी जानी : फ्रांस से लिए जा रहे 36 राफेल फाइटर प्लेन की डील में घोटाले के आरोप को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया हुआ है। इस डील की बारीकियों को जानने के लिए भी राहुल ने कई सत्र आयोजित किए हैं। इन सत्रों में सैन्य संसाधनों की खरीदी से जुड़े पूर्व अधिकारियों और विशेषज्ञों से बातचीत हुई। डील से जुड़े नियम, रक्षा सौदों में निजी हिस्सेदारी, एयरफोर्स की जरूरतों पर बत हुई। रक्षा सौदों में सीक्रेसी के एग्रीमेंट को भी उन्होंने समझा।
एक्सपर्ट्स की संख्या सीमित ताकि सबसे नजरें मिलाकर बात कर सकें : राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम गहरी रिसर्च के बाद मास्टर क्लास के लिए एक्सपर्ट का चुनाव करती है। उन्होंने अपनी टीम को निर्देश दिया है कि एक्सपर्ट्स की संख्या इतनी सीमित हो कि बातचीत के दौरान वे सबसे आंख-से-आंख मिलाकर बात कर सकें। पार्टी अध्यक्ष को कई तरह के विचारों से परिचित कराने के लिए ऐसे एक्सपर्ट्स को भी बुलाने की कोशिश रहती है, जो पार्टी से अलग राय रखते हों। टीम राहुल इन मास्टर क्लास में आने वालों के नाम उजागर नहीं करती, ताकि वे बेहिचक डायलॉग में शामिल हो सकें। यहां सवाल-जवाब का कोई तय फॉर्मेट नहीं होता है। ऐसे हर सत्र के मुख्य बिंदुओं को नोट किया जा रहा है। इन संवादों का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन भी तैयार हो रहा है।
दिल्ली से बाहर भी होंगे ऐसे सत्र : राजधानी में इन सत्रों की कामयाबी को देखते हुए टीम राहुल अब देश के अन्य शहरों में भी इस तरह की क्लास लगाने की सोच रही है। मकसद बेंगलुरु, मुम्बई, कोलकाता, जयपुर जैसे बड़े शहरों के एक्सपर्ट्स तक पहुंच बनाना है। यानी वो जो ‘लुटियंस जोन’ से अलग हटकर सोचते हों।