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कुमार विश्वास की व्यंग्य श्रृंखला: 2019 बताएगा कि किसे ‘नो’, किसे ‘कॉन्फिडेंस’ मिला

महाभारत 2019 के तहत ख्यात कवि कुमार विश्वास के 52 व्यंग्यों की सालभर चलने वाली श्रृंखला।

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2018, 07:18 AM IST
ख्यात कवि कुमार विश्वास। ख्यात कवि कुमार विश्वास।

ल शाम गोपालदास नीरज जी की श्रद्धांजलि सभा से लौटते हुए हाजी साथ थे। "नीरज जी की बड़ी याद आएगी! एक ‘तर्पण’ इनका भी बनता है तुम्हारी तरफ से।" अनमने भाव से मैंने सिर्फ इतना कहा, "इसमें भी कोई कहने वाली बात है।" संभवतः हाजी मेरी मनःस्थिति भांप गए थे, सो बात को दूसरी तरफ़ ले गए, "ये देखकर अच्छा लगा महाकवि, कि टेलीविज़न चैनलों ने नीरज जी पर ख़ूब चर्चा की, जबकि अविश्वास प्रस्ताव की ज़बर्दस्त खींच-तान चल रही थी।" मैंने कहा, "ये तो ज़रूरी था। राजनीति त्वरित है, साहित्य कालजयी है! हाजी शायद ऐसा ही कोई सिरा चाहते थे, "वैसे राहुल बाबा की झप्पी भी कालजयी हो गई महाकवि! बरसों पहले छूटे अभ्यास के कारण साहेब तो एकदम से हड़बड़ा ही गए! बॉलीवुड से बेहतर स्क्रिप्टिंग तो राजनीति में हो रही है।" मैं चाहकर भी मुस्कुरा न सका! हाजी भी छोड़ने को तैयार न थे, लेकिन अच्छी बहस और झप्पी एपिसोड के बाद आंख मारना ऐसे हो गया जैसे किन्नरों के घर बच्चा हुआ और उन्होंने ही अति-उत्साह में चूम-चूम कर मार दिया! मैंने कहा, "लिखा तो था मैंने ट्वीट, दिल बड़ा कीजिए, आंख ही तो मारी है, वरना इन सदनों में क्या-क्या मारा गया है, मुल्क को मालूम है।’"

हाजी ठठा कर हंसे, "पढ़ा था महाकवि! पढ़ा था, तुम्हारा भी अजीब है! तुम्हारी कविताओं और ट्वीट्स को सारी पार्टी यूज़ करती हैं पर तुम्हें एक ही पार्टी यूज़ कर पाई, मिस ही सही।" मैंने फिर पूछा, "छोड़ो ये बताओ, क्या ये बेकार की उठा-पटक नहीं थी? इतने हंगामे का नतीजा क्या निकला?" हाजी ने वक्तव्य सा दिया, "ये तो 2019 ही बताएगा कि नो कॉन्फिडेंस मोशन से किसे ‘नो’ और किसे ‘कॉन्फिडेंस’ मिला लेकिन, इतना तय है कि 2019 की गाड़ी मोशन में आ गई।"

मैंने फिर पूछा, "अच्छा जब विपक्ष को ये पता था कि अगला अकेला ही बहुमत में है, तो अविश्वास प्रस्ताव का क्या मतलब था?" हाजी शायद इसी सवाल की उम्मीद कर रहे थे, "अकेला चना भाड़ तो नहीं फोड़ सकता, लेकिन ढंग से उछल जाए तो भड़भूजे की आंख ज़रूर फोड़ सकता है। बस वही कोशिश थी!" मैंने कहा, "इतना आसान न समझो हाजी! ये वाला भड़भूजा रात को भी सन-ग्लास लगाकर बैठता है।"

हाजी ने बात पलटी, "तो टीडीपी वाला सन-ग्लास और शिवसेना वाला कवर ही सही, कुछ तो फूटा! बात समझो महाकवि! विपक्ष को कई मुद्‌दे चर्चा में लाने थे। इसके लिए सदन से अच्छा कोई प्लेटफार्म नहीं। और अविश्वास प्रस्ताव में जितना समय मिलता जाता है, उतना आम बहस में कहां मिलता है? ये सब बस 2019 के लिए मुद्‌दों को चर्चा में लाने का बहाना था।"


मैंने कहा, "और एक सौ पैंतीस करोड़ लोगों के प्रतिनिधियों की चर्चा में क्या आया? आंख मारना? झप्पी? मेरी मानो हाजी! ये सब मिलकर ऐसी छौंक लगाएंगे कि उसके धुएं में जनता को यह तक पता न चलने देंगे कि दाल पकी है या कढ़ी!" हाजी बोले, "नीरज जी को लेकर उदास न हो मेरी जान, संसद पर उन्हीं की पंक्तियां सुनो -"
"न तो पीने का सलीक़ा न पिलाने का शऊर,
ऐसे ही लोग चले आएं हैं मैखाने में!"

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ख्यात कवि कुमार विश्वास।ख्यात कवि कुमार विश्वास।
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