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महाभारत 2019: गलत दिशा में निकल गया अविश्वास का अल नीनो- कुमार विश्वास की व्यंग्य श्रृंखला

महाभारत 2019 के तहत ख्यात कवि कुमार विश्वास के 52 व्यंग्यों की सालभर चलने वाली श्रृंखला

Dainik Bhaskar

Jul 30, 2018, 07:07 AM IST
ख्यात कवि कुमार विश्वास। ख्यात कवि कुमार विश्वास।

सावन में नगरपालिका द्वारा विभिन्न सड़कों पर जहां-तहां मुहैया कराए गए निःशुल्क स्विमिंग पूल में से किसी एक का शिकार हुए हाजी की खाकी पैंट नीचे से लगभग चार इंच तक भीग कर ऐसे बदरंग लग रही थी, जैसे नक़्शे में पीओके। मुझे इस बात का बख़ूबी पता था कि हाजी पण्डित को खुले की बरसात छोड़िए परम एकांत वाले गुसलखाने तक में भीगना पसंद नहीं! ये हालत देख मैंने उन्हें छेड़ा, "क्या हाजी! पाजामे में ही गंगा स्नान कर आए, या मानसून ने पप्पी ले ली?" हाजी बोले, "काहे का मानसून महाकवि! हमारी तो राहुल बाबा जैसी चढ़कर उतर रही जवानी है, फ़ोन में मानसून लिखता हूं तो ऑटोकरेक्ट तक उसको ‘मनहूस’ लिख देता है।" मैंने कहा, "हाजी, कल तक पसीने पर रो रहे थे, आज पानी पर रो रहे हो। तुम तो घर ही रहा करो। तुम्हें कौन-सा संसद में मानसून सत्र अटेंड करना है!" हाजी ने मुझे उल्टा कुरेदा, "जैसे तुम जाते तो रामदास अठावले की तुकबंदी छंद में कर देते!" हाजी ने दूर का तीर मारा, "और ये क्या मानसून सत्र महाकवि! जब न कोई किसी की ‘मान’ रहा है और न कोई किसी की ‘सुन’ रहा है, तो किस बात का मानसून?"

"मैंने कहा, ‘ऐसा नहीं है हाजी, हर सत्र का अपना महत्व है। और इस बार तो अविश्वास प्रस्ताव भी आया।" हाजी चिढ़े बैठे थे, "काहे का अविश्वास विश्वास बाबू? मानसून सत्र भी कमबख़्त मौसम विभाग जैसा निकला। छतरियां कहीं खोली गईं और बादल कहीं और ही फट लिए। इधर मानसून सत्र की तुरही बजी, उधर पंचक शुरू हो गए। निपूती विपक्षी आंख ज़िंदगी में पहली दफ़ा तो फड़की फिर भी अविश्वास का अल नीनो गलत दिशा में निकल लिया।" रस आता देख मैंने बात बढ़ाई, "वैसे सत्र तो मज़ेदार रहा हाजी। ‘शेम-शेम’ के मंत्रोच्चार में तो आनंद ही आ गया। मुझे तो लगता है हर पार्टी ने 2-3 सांसद तो बस ‘शेम शेम’ चिल्लाने के लिए ही रखे हुए हैं! सवाल पूछने का काम दूसरे ग्रुप का है।" हाजी बोले, "अमां तुम तो पहले सवाल पूछने की ट्रेनिंग दिलवाओ महाकवि। सुना है गुप्तदान से राज्यसभा गए दो नए-नवेले सांसदों ने अपने नेता जैसी धूर्त मासूमियत ओढ़कर स्पीकर से एक गंभीर सवाल पूछ लिया कि- सर जी, हम क्लोरोमिंट क्यूं खाते हैं? यही सुनने के बाद संसद अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।" अचानक हंसी आने से मेरे हाथ के गिलास से पानी छलक गया। मैंने संभलकर पूछा, "मज़ाक एक तरफ़ हाजी, वैसे क्लोरोमिंट से याद आया। सावन में एक युवा सांसद द्वारा आंख मारे जाने पर इतना बुरा नहीं माना जाना चाहिए था। सावन और फ़ागुन में चिर-कुंवारों को इतनी आज़ादी तो मिलनी ही चाहिए।"


हाजी ने जोड़ा, "जवानी के मौसम में मानसून अगर ज्यादा लेट हो जाए तो बड़े-बड़े ख़ानदानों तक के युवक गलत जगह आंख दबाने लगते हैं महाकवि! वैसे सच पूछो तो दो दिन ही मज़ा आया मानसून सत्र में। उसके बाद तो सब इधर-उधर हो गए। और तो और, हज़रत जिन गायों को लेकर सदन में सांड हुए जाते थे उन्हें लेकर रवांडा रवाना हो गए हैं। अब क्या हम देशी लठैत पट्‌ठों के होते हुऐ गोभक्त भी रवांडा से आयात करेंगे?" मैंने कहा, "आज तुम शेर सुनो हाजी.."


"आंखों की मारामारी से आगे भी एक दर्द ,
जनता सहे जाती है हरेक पोर-पोर में!
हम सब के रहनुमा तो गले पड़ के मिल लिए,
रकबर की चीख़ दब गई संसद के शोर में!"

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ख्यात कवि कुमार विश्वास।ख्यात कवि कुमार विश्वास।
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