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महाभारत 2019: सीटें कम पड़ें तो ही होता है सियासत में सीजफायर- कुमार विश्वास

महाभारत 2019 के तहत ख्यात कवि कुमार विश्वास के 52 व्यंग्यों की सालभर चलने वाली श्रृंखला।

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 09:44 AM IST
ख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास। ख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास।

सुबह से लगातार इशारों में बतिया रहे हाजी से मैंने कहा, "अमां हाजी! ये सुबह से क्या नई नौटंकी लगा रखी है?" हाजी ने पहली बार ज़ुबान खोली, "ये नौटंकी नहीं, हमारा-तुम्हारा सीज़ फ़ायर है महाकवि।" मैंने कहा, "बातचीत बंद करने को सीज़ फ़ायर नहीं कहते हैं।" हाजी चहके, "ये तो मुझे भी मालूम है, लेकिन झगड़ा टालने का सबसे आसान तरीका यही है कि बातचीत ही न करो।" मैंने कहा, "हाजी, ख़ैर मनाओ कि बीवी नहीं है तुम्हारी। वरना पता चलता कि कुछ झगड़ों के होने में बातचीत होने न होने का कोई महत्व नहीं होता।"

स गृहयुद्ध के बारे में शून्य अनुभव होने के कारण हाजी ने बात घुमाई, "जैसे हिन्दुस्तान-पाकिस्तान।" मैंने गेंद लपकी, "तुम्हें ज्यादा पता होगा हाजी, तुम्हारे पास तो ज़ियारत और शादी-ब्याह वाले ढेरों पाकिस्तानी कस्टमर रहते हैं?" हाजी लंबी सांस लेकर बोले, "हैं नहीं थे महाकवि! लेकिन अब तो इन हालातों में उधर से गोला-बारूद के अलावा सब आना-जाना बंद है!"

मैंने कहा, "लेकिन सीज़-फ़ायर के दिनों में तो आ-जा सकते हैं।" वे बोले, "अमां सीज़ फ़ायर तो हमारी सेना की तरफ़ से होता है। उनके यहां तो दिन में जो सेना की वर्दी पहनकर सीज़ फ़ायर करते हैं, रात में आतंकवादियों की ड्रेस में वही फ़ायरिंग करते हैं।" मैंने कहा, "मतलब इधर से सीज़, उधर से फ़ायर!" फिर हाजी को कुरेदा, "अच्छा ये बताओ, जब सीज़ फ़ायर की घोषणा हो जाती है, तब भी फ़ायरिंग चालू रहती है। तो इसका नोटिस लेने वाला कोई नहीं है क्या? पाकिस्तान को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।"

हाजी उस्तादों की तरह बोले, "भोले न बनो महाकवि! जैसे तुम्हें पता ही नहीं कि जिन्हें नोटिस लेना है, वही लड़वा रहे हैं। सबकी अपनी दुकानदारी है।" फिर खींसे निपोरकर आंख मारते हुए बोले, "वैसे पाकिस्तान बहुत ज़िम्मेदार देश है महाकवि, दुनिया में विस्फोट कहीं भी हो ज़िम्मेदार वही पाया जाता है।" मैंने इशारा समझकर कहा, "सही कह रहे हो हाजी। ये फ़ायर, सीज़-फ़ायर सब स्क्रिप्टेड नाटक की तरह ही लगता है। बस दोनों तरफ़ के हमारे-उनके लड़के मरें और परदे के पीछे खड़ी तीसरी ताक़त की दुकानदारी चलती रहे।"

हाजी हंसकर बोले, "इसका तो मतलब हुआ कि यह लड़ाई-झगड़े का सिलसिला तुम्हारी और भाभीजी की लड़ाई की तरह चलता ही रहेगा?" मुझे हाजी से इस तरह की टिप्पणी की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। मैंने कहा, "शुक्र मनाओ हाजी कि तुम इस लड़ाई से बच गए, वरना कारतूस गिनने में ही उमर निकल जाती।"

हाजी ने एक बार फिर पटरी बदली, "यानी सियासी तरीका! वैसे सियासत में कभी सीज़ फ़ायर नहीं होता क्या?" मैंने कहा, "सियासत में सीज़-फ़ायर तभी होता है जब चुनाव हो गए हों, और सीटें कम पड़ रही हों। उस वक्त हर शकुनि को सभी कौरवों में युयुत्सु दिखने लगते हैं, और सारे अर्जुन गाण्डीव को नीचे धर सीज़-फ़ायर की मुद्रा में हाथों में कबूतर पकड़े नज़र आते हैं।" हाजी ने कहा, "मतलब कुल-मिला कर सीज़-फ़ायर एक भ्रम है। होता कहीं नहीं, बस डिक्शनरी की एक लाइन खाने का जुगाड़ है।"

भाई हो बिछुड़े हुए, भाई रहो,

भीख की ऐंठ से मिलेगा क्या?

चांद तक तुम हमारे साथ चलो,

फ़क़त घुसपैठ से मिलेगा क्या?

Mahabharat 2019 Kumar Vishwas satire Series third presentation
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ख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास।ख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास।
Mahabharat 2019 Kumar Vishwas satire Series third presentation
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