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बागपत से मिला महाभारत काल का रथ और नरकंकाल, कौरवों से यही गांव मांगा था पांडवों ने

बागपत उन 5 गांवों में से एक है जिसे पांडवों की ओर से श्रीकृष्ण ने कौरवों से मांगा था।

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 05:00 PM IST
Mahabharata, the interesting fact of Mahabharata, Baghpat, the Mahabharata chariot

रिलिजन डेस्क। आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को उत्तर प्रदेश के बागपत में 5 हजार साल पुरानी सभ्यता के सबूत मिले हैं। बागपत के सिनौली में खुदाई के दौरान 8 नरकंकाल और रथ के अवशेष मिलने से ये अनुमान लगाया जा रहा है कि ये महाभारत काल के हो सकते हैं। इस अभियान से जुड़े डॉ. संजय मंजुल का कहना है कि इसकी पुष्टि लैब में टेस्ट के बाद ही होगी। उल्लेखनीय है कि बागपत उन 5 गांवों में से एक है जिसे पांडवों की ओर से श्रीकृष्ण ने कौरवों से मांगा था।

क्या मिला है खुदाई में
एएसआई को खुदाई के दौरान ताबूत सहित 8 मानव कंकाल व उनके साथ तीन तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) मिले हैं। भारत में ASI की स्थापना के बाद से अभी तक हुई खुदाई व रिसर्च में पहली बार सिनौली से भारतीय यौद्धाओं के तीन रथ भी मिले हैं। यह विश्व इतिहास की एक दुर्लभतम घटना है।


महाभारत से कनेक्शन
इतिहासकार डॉ. केके शर्मा के अनुसार, महाभारत काल के दौरान बागपत कुरू जनपद का हिस्सा था, जिसकी प्राचीन राजधानी हस्तिनापुर व इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) रही है। बागपत उत्तर प्रदेश का एक शहर और ज़िला है। बागपत का प्राचीन नाम 'व्याघ्रप्रस्थ' या 'वृषप्रस्थ' कहा जाता है। मान्यता है कि बागपत उन 5 गांवों में एक है, जिनकी मांग युद्ध से पहले पांडवों की ओर श्रीकृष्ण ने कौरवों से की थी। बागपत के अलावा 4 गांव सोनपत, तिलपत, इंद्रपत और पानीपत कहे जाते हैं। लेकिन महाभारत में ये पांच गांव दूसरे ही हैं। ये हैं- अविस्थल, वृकस्थल, माकंदी, वारणावत और पांचवा नाम रहित कोई भी अन्य ग्राम। संभव है कि वृकस्थल बागपत का महाभारत कालीन नाम रहा हो।

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