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सिर्फ गंभीर बीमारियों में ही नहीं, कालसर्प और पितृदोष में भी असरदार है महामृत्युंजय मंत्र

यह मंत्र वेदों से लिया गया है। इस मंत्र में भगवान शिव की महिमा का वर्णन है।

Danik Bhaskar | Jun 20, 2018, 11:35 AM IST

रिलिजन डेस्क। भगवान शिव को मृत्यु का देवता और शमशान का वासी कहा जाता है। मृत्यु के डर पर जीत पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की जाती है। मृत्यु के भय से मुक्त होने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का विधान है। गंभीर बीमारियों, एक्सीडेंट और किसी भी ऐसी विपत्ति से बचने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है, जिस विपत्ति से इंसान की जान जा सकती है। इसके अलावा कुंडली के बुरे योगों, कालसर्प दोष, वास्तु दोष, पितृ दोष सभी का बुरा असर इस मंत्र के जाप से दूर हो सकता है।

शिव महापुराण सहित कई ग्रंथों ने महामृत्युंजय मंत्र के जाप का बहुत महत्व माना है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, यह मंत्र वेदों से लिया गया है। इस मंत्र में भगवान शिव की महिमा का वर्णन है। महामृत्युजंय का अर्थ होता है मृत्यु से जीतने वाला। कुछ ग्रंथों में इसे त्रयंबकम् मंत्र भी कहा गया है।

ये है महामृत्युंजय मंत्र…


ऊं त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥



मंत्र जाप करते समय रखें ये सावधानियां

1. सुबह स्नान आदि करने के बाद इस मंत्र सावधानी पूर्वक जाप करें। बोलते समय शब्दों का ध्यान रखें। जाप मन ही मन करें।

2. मंत्र जाप करते समय धूप-दीप जलते रहना चाहिए। जाप केवल रुद्राक्ष माला से ही करें।

3. इस मंत्र का जाप उस जगह पर करें, जहां भगवान शिव की मूर्ति, तस्वीर या महामृत्युमंजय यंत्र रखा हो।

4. मंत्र का जाप कुशा के आसान पर बैठकर करें। मंत्र का जाप एकाग्रता के साथ करें। अपने मन को भटकनें न दे।

5. अगर स्वयं इस मंत्र का जाप न कर सकें तो किसी योग्य पंडित से भी करवा सकते हैं।



ये हो सकते हैं फायदे

1. इस मंत्र के जाप से सभी ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं।

2. अगर परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार है तो उसकी हेल्थ में सुधार के लिए इस मंत्र जाप बहुत फायदेमंद हो सकता है।

3. इस मंत्र का जाप करने से भविष्य में आ सकने वाले संकट टलते हैं।

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