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डाउनलोड करेंआगरा. बच्चे की चाह हर माता-पिता के मन में होती है, लेकिन औलाद किसी बीमारी से ग्रसित पैदा होने पर कुछ कठोर दिल अपने अंश को बेसहारा छोड़ देते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है एक साल के गणेश की। जन्म से जेनेटिक डिसॉर्डर क्लेफ्ट लिप से ग्रसित इस बच्चे को उसके बायोलॉजिकल पेरेंट्स ने नदी किनारे मरने के लिए छोड़ दिया था। मैनपुरी निवासी कपल ने उस बच्चे को अपना कर नई जिंदगी दे दी।
- मैनपुरी के कुसुमारा गांव निवासी धर्मेंद्र बताते हैं, "पिछले साल गणेश विसर्जन के दिन मैं अपनी पत्नी के साथ घाट पर गया था। चारों तरफ गणपति के जयकारे लग रहे थे, खुशी का माहौल था। तभी मुझे एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। देखा तो नन्हा सा बच्चा जमीन पर अकेला पड़ा था। उसके मुंह से खून बह रहा था। उसका एक होंठ भी कटा हुआ था। मैंने बिना कुछ सोचे उसे गोद में उठाया और पत्नी के पास ले गया।"
- धर्मेंद्र ने बच्चे को कपड़े से साफ किया। उन्होंने काफी देर वहां इंतजार किया। जब कोई भी अपने खोए बच्चे को लेने नहीं आया, तो वे उसे अपने घर ले आए।
- धर्मेंद्र ने बच्चे का नाम गणेश रखा है, क्योंकि वह गणेशोत्सव के दिन मिला था। इनके परिवार में पहले से 7 बच्चे थे, लेकिन इन्होंने हंसी-खुशी गणेश को अपना लिया।
- धर्मेंद्र बताते हैं, "गणेश का ऊपर का होंठ कटा हुआ था। जेनेटिक कंडीशन की वजह से उसे यह तकलीफ है, इसलिए वह मुस्कुरा तक नहीं पाता। अब हमने इसका इलाज करवाने की ठानी।"
- गणेश की सर्जरी आगरा के प्लास्टिक सर्जन डॉ. सत्यकुमार सारस्वत ने 17 मई को अपने हॉस्पिटल में की। डॉक्टर साल 2007 में बनी यूएस बेस्ड फाउंडेशन 'स्माइल ट्रेन' से जुड़े हैं जो कि क्लेफ्ट लिप से ग्रसित बच्चों की सर्जरी करवाती है। पिछले 8 सालों में इस संस्था ने 5000 से ज्यादा बच्चों की सर्जरी मुफ्त की है।
- उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर गणेश और धर्मेंद्र की स्टोरी शेयर की।
- कुसुमारा निवासी धर्मेंद्र अखबार बांटकर 10 लोगों के परिवार का पेट पालते हैं। गणेश समेत उनके 8 बच्चे हैं।
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