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डाउनलोड करेंन्यूज डेस्क। पुणे में एक पूर्व पति ने पत्नी पर नजर रखने के लिए घर के वॉटर प्यूरीफायर में स्पाई कैमरा लगवा दिया। इस कैमरे को उसने मोबाइल से लिंक करवाया था। मोबाइल के जरिए बाहर रहते हुए भी पूर्व पति, पत्नी पर निगरानी रखता था। पत्नी का ध्यान जब कैमरे पर गया तो उसने पूर्व पति के खिलाफ FIR दर्ज करवाई।
इन सबके बीच हम आपको 'राइट टू प्राइवेसी' के उस कानून के बारे में बता रहे हैं, जिसके तहत यह सभी चीजें अपराध की श्रेणी में आती हैं। सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुका है कि प्राइवेसी (निजता) मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
किसी पर निगरानी नहीं रखी जा सकती
- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि, ससुराल में आने के बाद किसी शादीशुदा महिला की प्राइवेसी की मांग करना पति के प्रति क्रूरता नहीं होती। इसे तलाक का आधार नहीं बनाया जा सकता।
- प्राइवेसी किसी का भी मौलिक अधिकार है। निजता में किसी पर निगरानी नहीं रखी जाती।
- दूसरे लोग उसकी प्राइवेसी में खलल नहीं डालते। इसलिए जब भी कोई महिला अपने ससुराल जाती है तो उसके ससुराल वालों की यह ड्यूटी है कि वे उसे प्राइवेसी प्रदान करें।
क्या है राइट टू प्राइवेसी
- यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आती है। पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे फंडामेंटल राइट्स का हिस्सा करार दिया है।
- इसके बाद लोगों की पसर्नल डिटेल सार्वजनिक नहीं की जा सकती। शादी करने, बच्चे पैदा करने और साथ में फैमिली रखने जैसे मामले प्राइवेसी से जुड़े हुए हैं।
- मप्र हाईकोर्ट के एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि किसी के रूम में बिना उसकी परमीशन के कैमरा लगाना भी राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन है। ऐसा करने पर आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज होता है।
- मेहरा के मुताबिक, राइट टू प्राइवेसी में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, प्रॉपर्टी का अधिकार, बिजनेस करने का अधिकार, खाने-पीने सहित जीने का अधिकार भी शामिल है।
- राइट टू प्राइवेसी में यह प्रावधान भी शामिल है कि यदि कोई पैरेंट बच्चे को शारीरिक या मानिसक तौर पर प्रताड़ित करे और बच्चा इसकी शिकायत कर दे तो पैरेंट्स पर भी इस कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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